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    वेदाङ्गानि

    Dr. Rahul Maity Public
    ११/२४/२०२५, २:१९:३० अ (11/24/2025, 2:19:30 PM)
    छन्दः पादौ तु वेदस्य हस्तौ कल्पोऽथ पठ्यते ।
    ज्योतिषामयनं चक्षुर्निरुक्तं श्रोत्रमुच्यते ।।
    शिक्षा घ्राणं तु वेदस्य मुखं व्याकरणं स्मृतम् ।।
    तस्मात्साङ्गमधीत्यैव ब्रह्मलोके महीयते ।।

    अर्थ:-छन्द वेदरुपी पुरुष के पैर हैं, कल्प उसके दो हाथ हैं, ज्योतिष दो नेत्र हैं, निरुक्त दो कान हैं, शिक्षा नासिका है और व्याकरण मुख है। अतः अंगों सहित वेद का अध्ययन करके ही मनुष्य ब्रह्मलोक में महिमा को प्राप्त होता है।
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    सुमन्तमण्डलःPublic
    ११/२४/२०२५, ५:१०:५४ अ (11/24/2025, 5:10:54 PM)
    पाणिनीयशिक्षायां सम्यगेव वर्णिता एषा।
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    Dr. Rahul MaityPublic
    ११/२४/२०२५, ८:४३:३१ अ (11/24/2025, 8:43:31 PM)
    सत्यमुक्तं भवता। ततः एव गृहीतः श्लोकः।
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