भक्तिं प्रयच्छस्व मम हृदि शाश्वतीम्।
कामक्रोधलोभमदमोहहारिणि
मोहं हराशु सर्वमलं विलापय॥
अर्थ:
मैं दुर्गा को नमस्कार करता हूँ, जो भवबंधन से मुक्ति दिलाने वाली हैं।
मेरे हृदय में शाश्वत भक्ति प्रदान करो।
हे काम, क्रोध, लोभ, मद और मोह को हरने वाली!
शीघ्र मोह और सभी मलिनताओं को नष्ट कर दो।