क्रोधो दहति हृदयं निरन्तरम्।
लोभोऽपहरति बुद्धिं मदो विनाशयेत्
तान् सर्वान् नाशय देवि त्वं कृपया॥
अर्थ:
काम सदा मन में प्रवर्तित होता है,
क्रोध निरंतर हृदय को दहलाता है,
लोभ बुद्धि को हर लेता है, अहंकार विनाश करता है -
हे देवी! कृपया इन सभी को नष्ट कर दो।