मम हृदयं प्रक्षालय सर्वपापैः।
त्वत्सेवायां रतिं देवि देहि
त्वद्भक्तिं दृढां सनातनीं कुरु॥
अर्थ:
हे देवि दुर्गे! आपके प्रेम की वर्षा करने वाली!
मेरे हृदय को सभी पापों से प्रक्षालित करो।
हे देवी! मुझे आपकी सेवा में रति प्रदान करो,
दृढ़ सनातन भक्ति प्रदान करो।