🏠 Home community icon Community 🔍 Search 📚 eBooks
notification icon 0 Notifications
Notifications
    💬 Messaging WhatsApp icon Group YouTube icon YouTube

    Vidhya sagar Public
    १/११/२०२६, ७:२६:५९ अ (1/11/2026, 7:26:59 PM)
    निश्चय ही—यह श्लोक अविद्वान से उपदेश लेने के दुष्परिणाम और योग्य गुरु के चयन का महत्वपूर्ण संदेश देता है।
    📜 श्लोक

    विद्वानेवोपदेष्टव्यो नाविद्वांस्तु कदाचन ।
    वानरानुपदिश्याथ स्थानभ्रष्टा ययुः खगाः ॥

    🟦 संस्कृत अर्थ
    केवल विद्वान पुरुष से ही उपदेश लेना चाहिए, अविद्वान से कभी भी नहीं। क्योंकि बंदरों से उपदेश लेकर
    पक्षी अपने स्थान (घोंसलों) से वंचित हो गए।
    🟩 अर्थ :-
    उपदेश सदा ज्ञानी और विवेकी व्यक्ति से ही लेना चाहिए,
    मूर्ख या अज्ञानी व्यक्ति से नहीं। क्योंकि बंदरों की सलाह मानकर पक्षी अपना सुरक्षित स्थान खो बैठे।
    ---
    🟥 English Meaning:-
    One should take advice only from a learned person, and never from an ignorant one. For when the birds followed the advice of monkeys, they lost their proper place and shelter.
    ✍️ व्याख्या:-   यह श्लोक अत्यंत शिक्षाप्रद है। इसमें बताया गया है कि उपदेश देने वाले की योग्यता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बंदर स्वयं घर बनाना नहीं जानते, परंतु दूसरों को सलाह देने में आगे रहते हैं। पक्षियों ने जब बंदरों की बात मानकर अपने घोंसले तोड़ दिए, तो वे स्वयं आवासहीन हो गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि हर सलाह उपयोगी नहीं होती बिना ज्ञान और अनुभव वाले व्यक्ति की बात मानना हानिकारक हो सकता है इसलिए जीवन में गुरु, सलाहकार या मार्गदर्शक का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।
    Comment
    Views ५७.७ सह.
    Delete
    2 comments
    Profile pic
    Dr. Rahul MaityPublic
    १/११/२०२६, ९:३०:३१ अ (1/11/2026, 9:30:31 PM)
    कथायां तथा नास्ति भोः...
    वानाराणाम् उपदेशं श्रुत्वा खगाः गताः इति सर्वथैव असत्यम्।
    खगाः वानरान् उपदिशन्ति, येन क्रुद्धैः वानरैः नीडानि नाशितानि। अतः मुर्खान् मा उपदिशन्तु इति अस्य अर्थः।
    DislikeCommentDelete
    Profile pic
    Prema ShreePublic
    १/२४/२०२६, ५:४८:५२ अ (1/24/2026, 5:48:52 PM)
    सत्यमेव उक्तम्।
    DislikeCommentDelete
    लेखं लिखतु (Write a post)... ✏️

    यहाँ जो कुछ भी आप चाहें संस्कृत या विभिन्न भाषाओं में लेख​/पोस्ट करें। कृपया संस्कृत को प्राथमिक भाषा रखें ताकि दूसरों को सीखने और अभ्यास करने में सहयोग हो सके। आप प्रश्न पूछ सकते हैं, अपना ज्ञान साझा कर सकते हैं, या बस नमस्ते कह सकते हैं। कृपया संस्कृत के लिए देवनागरी में लिखें।

    Post anything you want here in Samskrit or multiple languages. Please keep Samskrit as the primary language so that others can learn and practice. You can ask questions, share your knowledge, or just say नमस्ते. Please write in Devanagari for Sanskrit.

    ...↓