अपि तु अनन्तमातृत्वप्रेम्णा स्नेहेन चापरिमेयेन॥
यत्रान्ये देवाः स्वभक्तानेव प्रसादयन्ति।
त्वं तु दयासिन्धो अभक्तानपि पालयसि मातः॥
अर्थ: हे माता! तुम नाम से जगन्माता हो, न कि केवल अपने अनंत महिमा से। बल्कि अनंत मातृत्व, प्रेम और अपरिमित स्नेह से। जहाँ अन्य देव केवल अपने भक्तों को प्रसन्न करते हैं, वहीं हे दयासिन्धो! तुम अभक्तों की भी रक्षा करती हो।