त्वं माता ब्रह्मणोऽप्याद्या त्वं माता विश्वभाविनी॥
प्रेम्णा तव न कोऽप्यन्तः स्नेहस्य न हि पारगः।
तस्मात् त्वामहं वन्दे मातरं सर्वरक्षिणीम्॥
अर्थ: तुम सभी भूतों की माता हो, सभी देहधारियों की माता हो, ब्रह्मा की भी आदि माता हो, विश्व की भावना करने वाली हो। तुम्हारे प्रेम का कोई अंत नहीं, तुम्हारे स्नेह की कोई सीमा नहीं। इसलिए मैं तुम्हें वंदन करता हूँ, हे सबकी रक्षा करने वाली माता!