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    रामायणम्

    Vimal Kumar Pandey (विमलकुमारपाण्डेयः) Public
    २/१०/२०२६, ८:३५:१७ अ (2/10/2026, 8:35:17 PM)
    वानरोऽहं महाभागे दूतो रामस्य धीमतः ।
    रामनामाङ्कितं चेदं पश्य देव्यङ्गुलीयकम् ॥ 
    प्रत्ययार्थं तवानीतं तेन दत्तं महात्मना ।
    समाश्वसिहि भद्रं ते क्षीणदुःखफला ह्यसि ॥
    गृहीत्वा प्रेक्षमाणा सा भर्तुः करविभूषणम् ।
    भर्तारमिव सम्प्राप्तं जानकी मुदिताऽभवत् ॥

    मैं परम बुद्धिमान् भगवान श्रीरामचन्द्र जी का दूत वानर हूं।
    देवी! इस श्रीराम नाम अङ्कित मुद्रिका को देखिए ।
    मैं इसे आपको विश्वास दिलाने के लिए लाया था, और यह आपको स्वयं प्रभु ने दिया था।
    अब आप चिन्ता न करें, क्योंकि आपके दुखों का काल समाप्त हो गया है।
    अपने पति के हाथ की शोभा बढ़ाने वाली, उस मुद्रिका को अपने हाथ में लेकर और उसे देखकर जानकी जी को ऐसी प्रसन्नता हुई, मानो
    श्रीरामचन्द्र जी उन्हें प्राप्त हो गए हो ।

    #लङ्काकाण्डम् #रामायणम् 

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    2 comments
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    Dr. Rahul MaityPublic
    २/१०/२०२६, ८:४९:०१ अ (2/10/2026, 8:49:01 PM)
    अहो सुन्दरं वर्णनम्। मोमुद्यते मे मनः।
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    आयुःPrivate
    २/११/२०२६, १२:२०:२० पू (2/11/2026, 12:20:20 AM)
    जय श्री राम
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