प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैःप्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः ।
विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः
प्रारब्धमुत्तमगुणा न परित्यजन्ति ॥
विघ्नों के डर से नीच लोग कार्य शुरू ही नहीं करते, और मध्यम लोग बाधा आने पर बीच में ही छोड़ देते हैं; किंतु उत्तम श्रेणी के लोग बार-बार बाधाएं आने पर भी शुरू किए हुए कार्य को पूर्ण किए बिना नहीं छोड़ते।
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भर्तृहरि यहाँ तीन तरह के इंसानों का वर्णन करते हैं। अधम (नीच) श्रेणी के लोग विघ्नों के डर से काम शुरू ही नहीं करते। मध्यम श्रेणी के लोग काम शुरू तो करते हैं, लेकिन जैसे ही पहली बाधा आती है, वे हार मान लेते हैं। लेकिन जो 'उत्तम' श्रेणी के लोग होते हैं, वे बार-बार बाधाएं आने पर भी, चोट खाने पर भी, अपने हाथ में लिए हुए काम को तब तक नहीं छोड़ते जब तक उसे पूरा न कर लें। जीवन का सबक यह है कि 'टैलेंट' से ज्यादा 'दृढ़ता' (Persistence) मायने रखती है। बाधाएं यह देखने आती हैं कि आप उसे छोड़ना चाहते हैं या उसे जीतना।
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This verse defines the Psychology of Grit. Bhartrihari categorizes people into three types based on their response to obstacles. The Lowest never start anything out of fear of failure. The Average start with enthusiasm but quit as soon as they encounter the first hurdle. However, the Superior beings, even when struck down repeatedly by obstacles, never abandon what they have started until the goal is reached. The life lesson is: Persistence is the highest virtue. Great things are not done by those who never fail, but by those who refuse to stop when they do.
#Motivation #सुभाषितम् #नित्यप्रेरणा