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    Dr. Mahima Shukla Public
    ३/२/२०२६, ६:२६:२७ पू (3/2/2026, 6:26:27 AM)
    विद्यालयस्य पत्रिकायां प्रकाशनार्थं एषा लघु-स्तुतिः -

    ।।सरस्वती स्तुतिः ।।
    शारदा शुभ्रवर्णा त्वं वीणापुस्तकधारिणी।
    हंसवाहा जगन्माता विद्यां मे संप्रयच्छतु ।।१ ।।
    अज्ञानध्वंसिनी देवी बुद्धिप्रज्ञाप्रदायिनी।
    प्रसादेन सरस्वत्याः मम वाणीं विशोधय ।।२ ।।
    - डॉ० महिमा शुक्ला
     हिंदी अर्थ
    प्रथम श्लोक का अर्थ- हे माँ शारदे! आप श्वेत (सफेद) वर्ण वाली हैं और आपने अपने हाथों में वीणा तथा पुस्तक धारण की हुई है। हंस की सवारी करने वाली संपूर्ण जगत की माता! आप मुझे (सच्ची) विद्या प्रदान करें।
    द्वितीय श्लोक का अर्थ- हे देवी! आप अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करने वाली हैं और श्रेष्ठ बुद्धि (तर्क शक्ति) तथा प्रज्ञा (विवेकपूर्ण ज्ञान) प्रदान करने वाली हैं। हे माँ सरस्वती! अपनी कृपा से मेरी वाणी को शुद्ध और सुसंस्कृत करें।


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    Amit GuptaPublic
    ३/२/२०२६, ४:०७:२२ अ (3/2/2026, 4:07:22 PM)
    जयतु संस्कृतम्! जयतु सरस्वती!
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    Prema ShreePublic
    ३/१३/२०२६, ११:१५:४७ पू (3/13/2026, 11:15:47 AM)
    हृदयस्पर्शी स्तुतिः।
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