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    आर्यभट्टः—ज्ञानस्य प्रकाशः, गणित-ज्योतिषयोः आधारस्तम्भः

    सुमन्तमण्डलः Public
    ४/१६/२०२६, ७:४९:३६ पू (4/16/2026, 7:49:36 AM)
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    सः एक: महान् गणितज्ञः , ज्योतिर्विदः च आसीत्। तस्य जन्म अश्मकदेशे अभवत्। सः कुसुमपुर्याम् अपठत् अवसत् च। यदा सः त्रयोविंशतिवर्षीयः तदा सः आर्यभटीयम् अलिखत्। केषाञ्चन वर्षाणाम् अनन्तरं सः आर्यभटीयसिद्धान्तम् अलिखत्। सः गुप्तकाञ्चनकाले अवसत्।

    ज्योतिश्शास्त्रस्य शास्तीयत्वं परिकल्पितम् आर्यभटेन एव। आर्यभटम् 'आर्यभट्टः’ इत्यपि निर्दिशन्ति केचन। आर्यभटः क्रि.श. ४७६ तमे वर्षे पाटलीपुत्रनगरे (पाटना) जातः इति, क्रि.श. ४९९ तमे वर्षे एषः 'आर्यभटीयम्’ इति ग्रन्थं लिखितवान् इति च ज्ञायते। एषः स्वस्य २३ तमे वयसि एव एतं सिद्धान्तप्रतिपादकं श्रेष्ठं ग्रन्थं रचितवान् आसीत् । एतस्मात् एव वयम् ऊहितुं शक्नुमः यत् एतस्य प्रतिभा कीद्दशी आसीत् इति। आर्यभटीयग्रन्थे महासङ्ख्याः अपि संज्ञारूपेण कथं सङ्ग्रहेण लेखनीयाः इति विषयः, वर्ग-घनमूल-त्रिभुजादिगणितविषयाः, कटपयादिसंज्ञाक्रमः, कालविभाग-नक्षत्रगति-भगण-दिनरात्र्यादिविषयाः चापि विवृताः सन्ति। 'मया नूतनतया किमपि न उच्यते, पूर्वजैः उक्तम् एव स्फुटतया निरूप्यते’ इति स्वग्रन्थे उक्तवान् अस्ति एषः । पञ्चाङ्गकर्तारः बहवः एतस्य सिद्धान्तम् एव अनुसरन्ति।
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    वे एक महान गणितज्ञ और ज्योतिर्विद् (खगोलशास्त्री) थे। उनका जन्म अश्मक देश में हुआ था। उन्होंने कुसुमपुर (पटना) में अध्ययन किया और वहीं निवास किया। जब वे तेईस वर्ष के थे, तब उन्होंने आर्यभटीय की रचना की। कुछ वर्षों के बाद उन्होंने आर्यभटीय सिद्धांत भी लिखा। वे गुप्तकाल में निवास करते थे।
    ज्योतिषशास्त्र को शास्त्रीय स्वरूप देने का श्रेय भी आर्यभट को ही जाता है। कुछ लोग उन्हें ‘आर्यभट्ट’ नाम से भी संबोधित करते हैं। यह ज्ञात होता है कि उनका जन्म ईस्वी सन् 476 में पाटलीपुत्र (पटना) में हुआ था और उन्होंने 499 ईस्वी में ‘आर्यभटीय’ नामक ग्रंथ लिखा। उन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में ही इस सिद्धांतपूर्ण श्रेष्ठ ग्रंथ की रचना कर दी थी। इससे हम उनकी अद्भुत प्रतिभा का अनुमान लगा सकते हैं।
    आर्यभटीय ग्रंथ में यह बताया गया है कि बड़ी-बड़ी संख्याओं को संज्ञाओं के माध्यम से संक्षेप में कैसे लिखा जाए। इसमें वर्ग, घनमूल, त्रिभुज आदि गणितीय विषयों का वर्णन है, साथ ही कटपयादि संज्ञा पद्धति, समय का विभाजन, नक्षत्रों की गति, ग्रहों की चाल, दिन-रात्रि आदि विषयों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है।
    उन्होंने अपने ग्रंथ में यह भी कहा है— “मैं कुछ भी नया नहीं कह रहा हूँ, बल्कि पूर्वजों द्वारा कही गई बातों को ही स्पष्ट रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ।”
    आज भी अनेक पंचांग बनाने वाले उनके सिद्धांतों का ही अनुसरण करते हैं।

    #आर्यभट्टः #संस्कृतम् #महापुरुषः
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    1 comments
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    Prema ShreePublic
    ४/१६/२०२६, ४:४७:०७ अ (4/16/2026, 4:47:07 PM)
    नमः एतादृशाय महापुरुषाय!
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    1 replies
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    सुमन्तमण्डलःPublic
    ४/२४/२०२६, ९:०५:१३ पू (4/24/2026, 9:05:13 AM)
    नमो नमः।
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