
गुह्यं निगूहति गुणान् प्रकटीकरोति ।
आपद्गतं च न जहाति ददाति काले
सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः ॥
सच्चा मित्र पाप से रोकता है, हित में लगाता है, गुप्त बातों को छिपाता है और गुणों को प्रकट करता है;वह संकट में साथ नहीं छोड़ता और समय पर सहायता करता है—यही श्रेष्ठ मित्र के लक्षण हैं।
यह सुभाषित 'सच्चे मित्र' (True Friend) के लक्षणों को परिभाषित करता है। संत कहते हैं कि एक सच्चा मित्र वही है जो:
1. आपको बुरे कार्यों (पाप) से रोकता है।
2. आपको हितकारी (अच्छे) कार्यों में लगाता है।
3. आपकी गुप्त बातों (कमजोरियों) को छिपा कर रखता है।
4. आपके गुणों को दूसरों के सामने प्रकट करता है।
जीवन का सबक यह है कि हमें न केवल ऐसे मित्र ढूंढने चाहिए, बल्कि स्वयं भी किसी के लिए ऐसा मित्र बनने का प्रयास करना चाहिए। दोस्ती केवल साथ घूमने या मजे करने का नाम नहीं है, बल्कि एक-दूसरे के चरित्र को ऊपर उठाने का माध्यम है।
This verse outlines the Six Hallmarks of a Noble Friend. According to the wise (Santah), a true friend is one who:
1. Restrains you from wrong-doing (Pāpāt).
2. Directs you toward beneficial paths (Hitāya).
3. Keeps your secrets/confidences private (Guhyam).
4. Highlights and celebrates your virtues (Gunān).
5. Never deserts you in times of trouble (Āpadgata).
Quality over Quantity. In a digital age of "followers" and "connections," real friendship is a spiritual partnership. A true friend acts as a moral compass and a shield. Are you surrounding yourself with people who make you better, or just people who make you comfortable?