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    Dr. T. C. Sharma Public
    ४/३०/२०२६, ८:४९:३३ अ (4/30/2026, 8:49:33 PM)
    मम एका धूमपानम् विषये रचना 
    धूमपान 
    Smoking 
    मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
    धूमपानं कर्तुं मित्राणि उपविशन्ति सह मया।
    (मित्र धुम्रपान करने के लिए मेरे साथ बैठते हैं।)

    हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया
    मम आरोग्यं शनै शनै धूम: कृतं हि मया।
    (मेरे स्वास्थ्य को धीरे धीरे मेरे द्वारा धूंआ कर दिया गया।)

    हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ा...
    मम आरोग्यं शनै शनै धूम: कृतं हि मया।

    बरबादियों का सोग मनाना फ़जूल था
    प्रथमं धूमपानं सर्वान् ददाति अतीव मुदा।
    (पहले पहले तो धुम्रपान सब को मजा देता है।)

    बरबादियों का सोग मनाना फ़जूल था,
    प्रथमं धूमपानं सर्वान् ददाति अतीव मुदा।

    मनाना फ़जूल था, मनाना फ़जूल था
    ददाति अतीव मुदा ददाति अतीव मुदा।


    बरबादियों का जश्न मनाता चला गया
    अनारोग्यस्य लक्षणम् उपेक्ष्यते सर्वदा मया
    (रोग के लक्षण की उपेक्षा करता चला गया)

    बरबादियों का जश्न मनाता चला गया
    अनारोग्यस्य लक्षणम् उपेक्ष्यते सर्वदा मया।

    हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ा...
    मम आरोग्यं शनै शनै धूम: कृतं हि मया।

    जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया
    धूमनिपायन् य: मिलित्वा तं भाग्यं ज्ञातवान्
    (धुम्रपान करने वाला जो मिला तो उसे ही भाग्य जान लिया)

    जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया
    धूमनिपायन् य: मिलित्वा तं भाग्यं ज्ञातवान्

    मुकद्दर समझ लिया, मुकद्दर समझ लिया
    भाग्यं ज्ञात्वान् भाग्यं ज्ञात्वान्

    जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया
    मां कास अभवत् तु अहं कासं कृतवान्।
    ( मेरे को खांसी हुई तो मैं खांसता गया) 

    जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया
    मां कास अभवत् तु अहं कासं कृतवान्।

    हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ा...
    मम आरोग्यं शनै शनै धूम: कृतं हि मया।

    ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
    लाभे हान्यां च भेद: न कदा ज्ञायते मया।
    (लाभ हानी का कभी मैंने भेद न जाना)

    ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ,
    लाभे हान्यां च भेद: न कदा ज्ञायते मया।

     न महसूस हो जहाँ, न महसूस हो जहाँ
    न कदा ज्ञायते मया न कदा ज्ञायते मया।

    मैं दिल को उस मुक़ाम पे लाता चला गया
    अनारोग्यं हि सर्वदा उपेक्ष्यते मया।
    ( रोग हमेशा मेरे द्वारा उपेक्षित किया गया)

    मैं दिल को उस मुक़ाम पे लाता चला गया
    अनारोग्यं हि सर्वदा उपेक्ष्यते मया।

    मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
    धूमपानं कर्तुं मित्राणि उपविशन्ति सह मया।

    हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया
    मम आरोग्यं शनै शनै धूम: कृतं हि मया।
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    Views २०.९ सह.
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    3 comments
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    अरुणःPublic
    ४/३०/२०२६, ९:३३:०७ अ (4/30/2026, 9:33:07 PM)
    अत्युत्तमा रचना! गीतस्य शैलीं अनुसृत्य धूमपानस्य आरम्भे सुखं, अन्ते दुःखं च सुन्दरं प्रदर्शितम्। एषा रचना केवलं मनोरञ्जनीया न, अपि तु शिक्षाप्रदा अपि अस्ति। 👏
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    अक्षयःPublic
    ४/३०/२०२६, ९:४४:५६ अ (4/30/2026, 9:44:56 PM)
    सर्वेषां कृते उत्तमः सन्देशः।
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    Prema ShreePublic
    ५/१/२०२६, १०:१५:११ पू (5/1/2026, 10:15:11 AM)
    धूम्रपानं स्वास्थ्यस्य कृते हानिकरम् अस्ति।
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