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    Kriti Gupta Public
    ५/२/२०२६, ७:०६:०२ अ (5/2/2026, 7:06:02 PM)
    एकस्मिन् ग्रामे एकः किसानः वसति स्म।
    तस्य एकः पुत्रः आसीत्।
    किसानः प्रतिदिनं क्षेत्रे कार्यं करोति स्म।
    पुत्रः अपि तेन सह गच्छति स्म।
    एकदा पुत्रः अकथयत्— "पितः! अहं क्रीडितुम् इच्छामि।"
    किसानः अवदत्— "पूर्वं कार्यं कुरु, ततः क्रीड।"
    पुत्रः कार्यं कृत्वा अनन्तरं क्रीडितवान्।
    सः अत्यन्तं सुखम् अनुभवत्।
    सः अवगच्छत् यत् कार्यं कृत्वा एव सुखं लभ्यते

    एक गाँव में एक किसान रहता था।
    उसका एक बेटा था।
    किसान रोज़ खेत में काम करता था।
    बेटा भी उसके साथ जाता था।
    एक दिन बेटे ने कहा— "पिताजी! मैं खेलना चाहता हूँ।"
    किसान ने कहा— "पहले काम करो, फिर खेलो।"
    बेटे ने काम करने के बाद खेला।
    उसे बहुत आनंद आया।
    उसने समझा कि काम करने के बाद ही सच्चा सुख मिलता है।
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    Views १९.८ सह.
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    2 comments
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    Prema ShreePublic
    ५/२/२०२६, ७:४१:२४ अ (5/2/2026, 7:41:24 PM)
    सरलः सुन्दरः च विचारः।
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    सुमन्तमण्डलःPublic
    ५/२/२०२६, ८:०९:२७ अ (5/2/2026, 8:09:27 PM)
    एतत् वचनं सत्यम् अस्ति।
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