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    SanskritKalp Support Public
    ५/७/२०२६, ५:५३:१४ अ (5/7/2026, 5:53:14 PM)
    उदयति विततोर्ध्वरश्मिरज्जावहिमरुचौ हिमधाम्नि याति चास्तम्।
    वहति गिरिरयं विलम्बिघण्टाद्वयपरिवारितवारणेन्द्रलीलाम्॥
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    अर्थ: जब एक ओर सूर्य उदय हो रहा हो और दूसरी ओर चंद्रमा अस्त हो रहा हो, तो वह पर्वत (रैवतक) एक ऐसे विशाल हाथी की तरह प्रतीत होता है जिसके दोनों ओर दो बड़ी घण्टियाँ लटक रही हों।
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