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    Kriti Gupta Public
    ५/९/२०२६, ७:०२:०५ अ (5/9/2026, 7:02:05 PM)
    एकस्मिन् ग्रामे एकः बालकः वसति स्म।
    तस्य नाम मोहनः आसीत्।
    सः प्रतिदिनं विद्यालयं गच्छति स्म।
    एकदा मार्गे सः एकं धनपूर्णं पात्रं प्राप्तवान्।
    तस्मिन् पात्रे बहूनि मुद्राणि आसन्।
    मोहनः लोभं न अकरोत्।
    सः तत् पात्रं ग्रामस्य वृद्धाय अददात्।
    वृद्धः अतीव प्रसन्नः अभवत्।
    सः मोहनं आशीर्वादं दत्तवान्।
    सत्यस्य सदैव विजयः भवति।



    एक गाँव में एक बालक रहता था।
    उसका नाम मोहन था।
    वह प्रतिदिन विद्यालय जाता था।
    एक दिन रास्ते में उसे धन से भरा हुआ एक बर्तन मिला।
    उस बर्तन में बहुत से सिक्के थे।
    मोहन ने लालच नहीं किया।
    उसने वह बर्तन गाँव के बूढ़े व्यक्ति को दे दिया।
    वृद्ध व्यक्ति बहुत प्रसन्न हुआ।
    उसने मोहन को आशीर्वाद दिया।
    सत्य की हमेशा विजय होती है।
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    2 comments
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    अरुणःPublic
    ५/९/२०२६, ८:३४:३१ अ (5/9/2026, 8:34:31 PM)
    साधु, मोहन! त्वं महान् असि।
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    Kriahna kumar TripathiPublic
    ५/१०/२०२६, ७:२३:०० पू (5/10/2026, 7:23:00 AM)
    उत्तमं कार्यं 🙌
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