विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्
विद्या भोगकरी यशःसुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः ।
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता
विद्या राजसु पूज्यते न तु धनं विद्याविहीनः पशुः ॥
विद्या मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य और छिपा हुआ सुरक्षित धन है; विद्वान की पूजा राजाओं के यहाँ भी होती है, इसलिए विद्या के बिना मनुष्य पशु समान है।
अन्वयः (Anvaya)
विद्या नाम नरस्य अधिकं रूपम्, (एषा) प्रच्छन्नगुप्तं धनं (अस्ति)। विद्या भोगकरी, यशःसुखकरी (च अस्ति), विद्या गुरूणां गुरुः (अस्ति)। विदेशगमने विद्या बन्धुजनः, विद्या परं दैवतम्। राजसु विद्या पूज्यते, धनं न (पूज्यते)। विद्याविहीनः (नरः) पशुः (भवति)।
संस्कृत-व्याख्या (Sanskrit Meaning)
प्रच्छन्नगुप्तम्: अत्यन्तं सुरक्षितं निगूढं च (Extremely well-hidden and secure).
भोगकरी: सुखसाधनानां प्रदात्री (Provider of enjoyments/comforts).
बन्धुजनः: मित्रम् अथवा सम्बन्धी (A relative or kinsman).
राजसु: नृपेषु (Among kings or rulers).
विद्याविहीनः: ज्ञानरहितः मनुष्यः (A person without knowledge).
भावार्थः
विद्या मनुष्यस्य वास्तविकं सौन्दर्यम् अस्ति। सा गुप्तधनमिव अस्ति या केनापि चोरयितुं न शक्यते। सा विदेशे मित्रवत् साहाय्यं करोति। विद्याहीनः मनुष्यः पुच्छविषाणरहितः पशुः एव।
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यह श्लोक 'विद्या' की महिमा को सात अलग-अलग रूपों में बताते हैं। विद्या केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि मनुष्य का वास्तविक रूप (सौन्दर्य) है। यह एक ऐसा गुप्त धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता।
सच्चा मित्र: विदेश में या अपरिचित परिस्थितियों में आपकी बुद्धि और विद्या ही आपकी सबसे बड़ी 'सम्बन्धी' होती है।
सम्मान का आधार: राजाओं के यहाँ भी विद्वानों की पूजा होती है, केवल धनवानों की नहीं।
धन और जवानी समय के साथ फीके पड़ जाते हैं, लेकिन विद्या ही वह संपत्ति है जो बांटने से बढ़ती है और संकट में ढाल बनती है। शिक्षा के बिना मनुष्य का जीवन केवल भौतिक आवश्यकताओं (खाने-सोने) तक सीमित रह जाता है, जो कि पशु के समान है।
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This shloka defines Education/Knowledge as the ultimate human asset.
The Invisible Armor: It is a hidden treasure that no thief can touch and no government can tax.
The Global Companion: When you travel to a foreign land or face unfamiliar challenges, your skills and knowledge are your only true relatives.
The Meritocracy: True respect in the highest circles (symbolized by 'Kings') is given to wisdom, not just material wealth.
Knowledge is the only investment with a guaranteed return. It provides not just a livelihood (Bhoga), but also fame (Yash) and happiness (Sukha). To be without the desire to learn is to live at a purely instinctual level. Knowledge is what makes us human.
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