भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमै-र्नवाम्बुभिर्भूरिविलम्बिनो घनाः ।
अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः
स्वभाव एष परोपकारिणाम् ॥
फल आने पर पेड़ झुक जाते हैं और जल से भरे बादल धरती के करीब आ जाते हैं; वैसे ही सज्जन समृद्धि पाकर विनम्र हो जाते हैं—यही परोपकारियों का स्वभाव है।
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अन्वयः (Anvaya)
तरवः फलोद्गमैः नम्राः भवन्ति, घनाः नवाम्बुभिः भूरिविलम्बिनः (भवन्ति), सत्पुरुषाः समृद्धिभिः अनुद्धताः (भवन्ति); परोपकारिणाम् एषः स्वभावः (अस्ति)।
संस्कृत-व्याख्या (Sanskrit Meaning)
तरवः: वृक्षाः (Trees).
फलोद्गमैः: फलानां उत्पत्त्या (With the appearance of fruits).
नम्राः: झुकने वाले / विनीताः (Humble/Bending down).
घनाः: मेघाः (Clouds).
नवाम्बुभिः: नूतन-जलैः (With fresh rainwater).
अनुद्धताः: गर्वशून्याः/विनयशीलाः (Without arrogance/Humble).
समृद्धिभिः: ऐश्वर्येण (With wealth/prosperity).
भावार्थः
यथा फलैः युक्ताः वृक्षाः नम्राः भवन्ति, जलपूर्णाः मेघाः अपि नीचैः आगच्छन्ति, तथैव सज्जनाः धनं प्राप्य अपि अभिमानं न कुर्वन्ति। एषः तेषां नैसर्गिकः स्वभावः अस्ति।
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भर्तृहरि यहाँ 'विनम्रता' (Humility) और 'परोपकार' के बीच के सम्बंध को समझाते हैं। वे प्रकृति के तीन उदाहरण देते हैं:
वृक्ष: जब पेड़ों पर फल आते हैं, तो वे और अधिक झुक जाते हैं ताकि लोग आसानी से फल तोड़ सकें।
बादल: जब बादलों में नया पानी भर जाता है, तो वे धरती के करीब आ जाते हैं ताकि प्यास बुझा सकें।
सज्जन व्यक्ति: जब श्रेष्ठ लोगों के पास धन और समृद्धि आती है, तो वे अभिमानी होने के बजाय और अधिक विनम्र हो जाते हैं।
जीवन का सबक: सफलता की असली पहचान अहंकार नहीं, बल्कि झुकना है। जैसे-जैसे आप जीवन में ऊँचे उठें, वैसे-वैसे अपनी जड़ों और दूसरों की सेवा के प्रति और अधिक समर्पित हों। परोपकार करने वालों के लिए यह कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका सहज स्वभाव होता है।
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This verse teaches us about Authentic Greatness through the lens of nature. It observes:
Trees: When they bear fruit, they bend down to make the fruit accessible to others.
Clouds: When they are heavy with rain, they hang low toward the earth to nourish it.
Noble People: When they attain wealth and prosperity, they become even more humble and accessible.
The Life Lesson: Prosperity is a test of character. A common person becomes arrogant with wealth, but a truly great soul uses success as a reason to be more helpful and grounded. Real power is reflected in how much you can give and how kindly you can behave toward those who have less.
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