सिंहः शिशुरपि निपतति मदमलिनकपोलभित्तिषु गजेषु ।प्रकृतिरियं सत्त्ववतां न खलु वयस्तेजसो हेतुः ॥
सिंह का बच्चा छोटा होने पर भी मदमस्त हाथियों के मस्तक पर ही झपटता है; पराक्रमी पुरुषों का यह सहज स्वभाव होता है, उनकी वीरता उम्र की मोहताज नहीं होती।
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अन्वयः (Anvaya)
सिंहः शिशुः अपि मदमलिनकपोलभित्तिषु गजेषु निपतति। सत्त्ववताम् इयं प्रकृतिः (अस्ति), वयः तेजसः हेतुः न खलु।
संस्कृत-व्याख्या (Sanskrit Meaning)
सिंहशिशुः: सिंहस्य शावकः (A lion cub).
निपतति: आक्रमणं करोति (Attacks/Pounces upon).
मदमलिनकपोलभित्तिषु: मदजलेन मलिनाः कपोलाः (गण्डस्थलाः) येषाम् तेषु (Upon elephants whose temples are wet with rut).
सत्त्ववताम्: पराक्रमिणां धैर्यशालिनां वा (Of the strong, courageous, or high-spirited souls).
प्रकृतिः: स्वभावः (Inherent nature).
वयः: आयुः (Age).
तेजसः: पराक्रमस्य/सामर्थ्यस्य (Of brilliance, prowess, or inner fire).
हेतुः: कारणम् (Reason/Factor).
भावार्थः: यथा एकः लघुः सिंहशावकः अपि स्वभावात् एव विशालकायं गजं प्रति आक्रमितुं उद्यतः भवति, तथैव पराक्रमिणां सामर्थ्यं तेषां आयुषि न निर्भरं भवति। प्रतिभा वयसः अपेक्षाम् न करोति।
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यह श्लोक 'आत्मविश्वास' और 'स्वाभाविक क्षमता' का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
भर्तृहरि कहते हैं कि सिंह (शेर) का बच्चा चाहे कितना भी छोटा (शिशु) क्यों न हो, वह विशालकाय हाथियों के मस्तक पर ही आक्रमण करता है। यह पराक्रमी और शक्तिशाली जीवों का सहज स्वभाव (प्रकृति) होता है। उनकी वीरता या तेज का कारण उनकी 'उम्र' या 'आकार' नहीं होता, बल्कि उनका आंतरिक आत्मबल होता है।
जीवन का सबक: अपनी योग्यताओं को अपनी उम्र, अनुभव के वर्षों या शारीरिक बनावट से मत आंकिए। यदि आपके पास प्रतिभा, साहस और सही दृष्टिकोण है, तो आप बड़े से बड़े लक्ष्यों (हाथियों) को भेद सकते हैं। नेतृत्व और उत्कृष्टता का संबंध आंतरिक ऊर्जा से है, कैलेंडर की तारीखों से नहीं।
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This verse is a powerful statement on Inherent Capability and Confidence.
Bhartrihari notes that a lion cub, even if very young and small, instinctively pounces upon massive, fully-grown elephants. This bold attitude is the very nature of high-spirited and courageous souls. Age or physical size is never the determining factor for their inner fire (Tejas).
The Life Lesson: True competence is a mindset. Do not let your age, lack of seniority, or external stature make you feel inadequate in front of massive challenges. Brilliance and leadership do not wait for a certain age to manifest. Your capability is defined by the depth of your courage and the sharpness of your intellect.
#Sanskrit #Motivation #नित्यप्रेरणा