(परिश्रम से ही काम सिद्ध होते हैं)
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
"उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः" — काम सिर्फ़ इच्छा करने से नहीं, परिश्रम से पूरे होते हैं।
जैसे — सोते हुए शेर के मुँह में हिरण ख़ुद चलकर नहीं आते। 🦌
हमें उठकर प्रयास करना ही पड़ता है।