तत् केवलं मम मस्तिष्कात् परीक्षा-काले 'गायब' भवति!
अर्थ: (यह विद्या की परिभाषा पर एक मजेदार व्यंग्य है) जिसे न चोर चुरा सकता है, न राजा छीन सकता है, न भाइयों में बांटा जा सकता है और न ही जिसका कोई वजन होता है... वह ज्ञान केवल परीक्षा के समय ही मेरे दिमाग से 'गायब' हो जाता है!
विद्या खलु हास्यप्रदा।