ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
ॐ भूउर्-भुवः स्वः
तत्-सवितुर्-वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रकोदयात् ||
अर्थ :
1: ओम , भू लोक (पृथ्वी, भौतिक तल की चेतना), भुवर लोक (अंतरिक्ष, मध्यवर्ती स्थान, प्राण की चेतना) और स्वर लोक (आकाश, स्वर्ग, दिव्य मन की चेतना) में व्याप्त है,
2: वह सवितुर (सावित्री, सूर्य का दिव्य सार) जो सबसे मनमोहक है ,
3: मैं उस दिव्य तेज का ध्यान करता हूं ,
4: वह हमारी आध्यात्मिक बुद्धि (आध्यात्मिक चेतना) को जागृत करें।
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
ॐ भूउर्-भुवः स्वः
तत्-सवितुर्-वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रकोदयात् ||