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    Anjana K Public
    ६/२४/२०२५, ६:५२:४१ अ (6/24/2025, 6:52:41 PM)
    नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
    🔸 स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ इस योगमार्ग में किया गया थोड़ा भी प्रयास नष्ट नहीं होता और न ही इसमें कोई पाप का दोष है। यह थोड़ा-सा भी धर्म, महान भय (जन्म-मरण) से रक्षा करता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ In this path of yoga, no effort is ever lost, nor is there any negative consequence. Even a little practice of this dharma protects one from great fear (of birth and death).
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    🔢 श्लोक संख्या: 7
    🔸 न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
    🔸 कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ कोई भी व्यक्ति एक क्षण के लिए भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता। प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति से उत्पन्न गुणों द्वारा विवश होकर कर्म करना पड़ता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ No one can remain without action even for a moment. Everyone is forced to act according to the qualities born of their nature.
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    🔢 श्लोक संख्या: 8
    🔸 सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
    🔸 अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ सभी धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा, इसलिए शोक मत करो।
    🌍 English Translation:
    ✨ Abandon all varieties of dharma and simply surrender unto Me. I shall liberate you from all sins; do not grieve.
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    🔢 श्लोक संख्या: 9
    🔸 योगस्थः कुरु कर्माणि संगं त्यक्त्वा धनञ्जय।
    🔸 सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ हे अर्जुन! योग में स्थित होकर कर्म करो, आसक्ति को त्याग कर। सफलता और असफलता में समान रहना ही योग कहलाता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ O Arjuna! Perform your duties while being steadfast in yoga, abandoning attachment, and remaining indifferent to success or failure. This evenness of mind is called yoga.
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    🔢 श्लोक संख्या: 10
    🔸 यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन।
    🔸 ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ हे अर्जुन! जैसे प्रज्वलित अग्नि लकड़ियों को जलाकर भस्म कर देती है, वैसे ही ज्ञान की अग्नि समस्त कर्मों को भस्म कर देती है।
    🌍 English Translation:
    ✨ O Arjuna! Just as a blazing fire reduces wood to ashes, similarly, the fire of knowledge burns all karma to ashes.
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    🔢 श्लोक संख्या: 11
    🔸 उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
    🔸 आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ मनुष्य को स्वयं ही अपना उद्धार करना चाहिए और स्वयं को पतन की ओर नहीं ले जाना चाहिए, क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र और शत्रु होती है।
    🌍 English Translation:
    ✨ One must elevate oneself by one’s own mind and not degrade oneself. The mind alone is both the friend and the enemy of the self.
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    🔢 श्लोक संख्या: 12
    🔸 ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः।
    🔸 तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम्॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जिनका अज्ञान आत्मज्ञान से नष्ट हो चुका है, उनके लिए यह ज्ञान सूर्य के समान परम तत्व को प्रकाशित करता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ For those whose ignorance is destroyed by knowledge, that knowledge, like the sun, reveals the Supreme Truth.
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    🔢 श्लोक संख्या: 13
    🔸 श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप।
    🔸 सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ हे परंतप अर्जुन! पदार्थों से किया गया यज्ञ ज्ञान यज्ञ से श्रेष्ठ है, क्योंकि सभी कर्म ज्ञान में ही समाप्त हो जाते हैं।
    🌍 English Translation:
    ✨ O Arjuna! The sacrifice performed in knowledge is superior to mere material offerings, for all actions ultimately culminate in knowledge.
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    🔢 श्लोक संख्या: 14
    🔸 निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः।
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ निराश्रय, ममता से रहित और चिंता से मुक्त होकर युद्ध करो।
    🌍 English Translation:
    ✨ Fight without attachment, free from desire, and with a peaceful mind.
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    🔢 श्लोक संख्या: 15
    🔸 विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः।
    🔸 रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ इंद्रियों के विषय त्याग देने पर भी, उनमें आसक्ति बनी रहती है; किंतु परम तत्व के दर्शन के बाद वह भी समाप्त हो जाती है।
    🌍 English Translation:
    ✨ Even when one abstains from sensual pleasures, the taste for them remains; but upon realizing the Supreme, even this taste disappears.
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    🔢 श्लोक संख्या: 16
    🔸 कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम्।
    🔸 अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम्॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो व्यक्ति काम और क्रोध से मुक्त हैं, जिन्होंने अपने मन को वश में कर लिया है और आत्मज्ञान प्राप्त कर लिया है, वे सभी ओर से ब्रह्मनिर्वाण (परम शांति) को प्राप्त होते हैं।
    🌍 English Translation:
    ✨ For those who are free from lust and anger, who have subdued their mind and attained self-realization, Brahman’s ultimate peace is near.
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    🔢 श्लोक संख्या: 17
    🔸 नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः।
    🔸 मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम्॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ मैं सभी के लिए प्रत्यक्ष नहीं होता क्योंकि योगमाया से ढका हुआ हूँ। यह मोहग्रस्त संसार मुझे अजन्मा और अविनाशी परमात्मा के रूप में नहीं जानता।
    🌍 English Translation:
    ✨ I am not manifest to everyone, being veiled by My divine yoga-maya. The deluded world does not recognize Me as the unborn and imperishable Supreme.
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    🔢 श्लोक संख्या: 18
    🔸 स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा।
    🔸 कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ हे अर्जुन! अपने स्वभाव से उत्पन्न कर्म के अनुसार तुम बंधे हुए हो। मोहवश जो तुम करना नहीं चाहते, उसे भी तुम करने के लिए विवश हो जाओगे।
    🌍 English Translation:
    ✨ O Arjuna! Being bound by your nature-born duties, you will involuntarily act according to them, even against your will, due to illusion.
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    🔢 श्लोक संख्या: 19
    🔸 बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम्।
    🔸 स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो व्यक्ति बाहरी विषयों में आसक्त नहीं होता और अपने भीतर आनंद प्राप्त करता है, वह ब्रह्मयोग में स्थित होकर शाश्वत सुख का अनुभव करता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ The one who is unattached to external pleasures and finds joy within the self, being united with Brahman through yoga, attains eternal bliss.
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    🔢 श्लोक संख्या: 20
    🔸 न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः।
    🔸 यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो शरीर धारण किए हुए हैं, वे समस्त कर्मों का पूरी तरह से त्याग नहीं कर सकते, लेकिन जो केवल कर्मफल का त्याग करता है, वही सच्चा संन्यासी कहलाता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ For those who have taken a body, complete renunciation of action is not possible. But one who renounces the fruits of action is truly considered a renunciate.
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    🔢 श्लोक संख्या: 21
    🔸 विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः।
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जिसका इच्छा, भय और क्रोध समाप्त हो चुका है, वह सदा मुक्त रहता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ One who is free from desires, fear, and anger is always liberated.
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    🔢 श्लोक संख्या: 22
    🔸 नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।
    🔸 न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ हे अर्जुन! जो अत्यधिक भोजन करता है, या जो बिल्कुल नहीं खाता, जो बहुत अधिक सोता है या जो बिल्कुल नहीं सोता, उसका योग संभव नहीं है।
    🌍 English Translation:
    ✨ O Arjuna! There is no possibility of yoga for one who eats too much or too little, who sleeps excessively or who does not sleep at all.
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    🔢 श्लोक संख्या: 23
    🔸 न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते।
    🔸 न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ कर्मों का त्याग करने मात्र से मनुष्य निष्कर्मता (क्रियाहीनता) को प्राप्त नहीं करता और न ही केवल संन्यास धारण कर सिद्धि प्राप्त कर सकता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ A person does not attain freedom from action by merely abstaining from work, nor does he achieve perfection merely by renouncing action.
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    🔢 श्लोक संख्या: 24
    🔸 नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया।
    🔸 शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ मुझे इस दिव्य रूप में न तो वेदों के अध्ययन द्वारा, न तपस्या से, न दान से और न ही यज्ञ से देखा जा सकता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ Neither through the Vedas, nor through austerities, nor by charity, nor by sacrifice can I be seen in this divine form as you have seen Me.
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    🔢 श्लोक संख्या: 25
    🔸 प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
    🔸 अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ प्रकृति के गुणों से सभी कर्म संपन्न होते हैं, परंतु अहंकार से मोहग्रस्त व्यक्ति सोचता है कि वह स्वयं कर्ता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ All actions are performed by the modes of material nature, but one whose mind is deluded by ego thinks, “I am the doer.”
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    🔢 श्लोक संख्या: 26
    🔸 मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
    🔸 मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ मुझे मन से स्मरण करो, मेरे भक्त बनो, मेरी पूजा करो और मुझे प्रणाम करो। इस प्रकार आत्मा को मुझमें समर्पित करके तुम निश्चित रूप से मुझमें ही आओगे।
    🌍 English Translation:
    ✨ Fix your mind on Me, be devoted to Me, worship Me, and offer obeisance to Me. Thus, uniting yourself with Me, you shall surely come to Me.
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    🔢 श्लोक संख्या: 27
    🔸 यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
    🔸 तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर अर्जुन हैं, वहीं पर निश्चित रूप से श्री, विजय, ऐश्वर्य और अचल नीति होती है, यह मेरा मत है।
    🌍 English Translation:
    ✨ Wherever there is Lord Krishna, the Master of Yoga, and wherever there is Arjuna, the wielder of the bow, there will certainly be fortune, victory, prosperity, and unwavering righteousness. This is my opinion.
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    🔢 श्लोक संख्या: 28
    🔸 अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
    🔸 तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो भक्त अनन्य भाव से मेरा चिंतन और उपासना करते हैं, मैं उनके योग (नवीन आवश्यकताओं) और क्षेम (जो कुछ उनके पास है उसकी रक्षा) का वहन करता हूँ।
    🌍 English Translation:
    ✨ To those who always worship Me with exclusive devotion, thinking of Me alone, I provide what they lack and preserve what they have.
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    🔢 श्लोक संख्या: 29
    🔸 यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः।
    🔸 समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो व्यक्ति बिना इच्छा के प्राप्त होने वाले में संतुष्ट रहता है, जो द्वंद्वों से परे है, जिसमें ईर्ष्या नहीं है, और जो सफलता तथा असफलता में समान भाव रखता है, वह कर्म करने पर भी बंधन में नहीं पड़ता।
    🌍 English Translation:
    ✨ He who is content with whatever comes by chance, who is free from dualities and envy, and who remains steady in success and failure, is not bound by actions.
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    🔢 श्लोक संख्या: 30
    🔸 नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन।
    🔸 न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ ऐसे सिद्ध पुरुष के लिए न तो कर्म करने में कोई प्रयोजन रहता है और न ही कर्म न करने से कोई हानि होती है। और न ही उसे किसी अन्य जीव पर निर्भर रहने की आवश्यकता होती है।
    🌍 English Translation:
    ✨ For such a realized soul, there is no purpose in performing work, nor any reason for not performing it. Nor does he depend on any living being for any purpose.
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    🔢 श्लोक संख्या: 31
    🔸 श्रद्धावान्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।
    🔸 ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ श्रद्धावान् पुरुष जो ज्ञान के लिए तत्पर रहता है और अपने इंद्रियों को संयमित रखता है, वह ज्ञान प्राप्त करता है। और जब उसे ज्ञान प्राप्त हो जाता है, तब वह शीघ्र ही परम शांति को प्राप्त कर लेता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ A faithful person, who is devoted to knowledge and has control over the senses, attains divine knowledge. Having gained this knowledge, he quickly attains supreme peace.
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    🔢 श्लोक संख्या: 32
    🔸 योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
    🔸 सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ हे धनंजय! योग में स्थित होकर, आसक्ति को त्यागकर कर्म करो। सफलता और असफलता में समान भाव रखना ही योग कहलाता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ O Dhananjaya (Arjuna), perform your duties established in yoga, renouncing attachment. Maintain equanimity in success and failure, for such evenness of mind is called yoga.
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    🔢 श्लोक संख्या: 33
    🔸 व्यासोच्छिष्टं जगत्सर्वं मुखे व्यासस्य मे स्थितम्।
    🔸 व्यासाद्विनिर्गता वाणी सर्वत्र गतिरस्ति मे॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ महर्षि व्यास द्वारा कहे गए शब्द ही सम्पूर्ण जगत में व्याप्त हैं। उनके वचनों में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सार निहित है और मेरी वाणी सर्वत्र व्याप्त है।
    🌍 English Translation:
    ✨ The words spoken by Sage Vyasa pervade the entire universe. His words contain the essence of the whole cosmos, and my speech is present everywhere.
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    🔢 श्लोक संख्या: 34
    🔸 नित्यसत्त्वस्थः शुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः।
    🔸 सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो सदा सत्वगुण में स्थित रहता है, जिसकी आत्मा शुद्ध होती है, जिसने मन पर विजय प्राप्त कर ली है, तथा जिसने इंद्रियों को वश में कर लिया है—वह समस्त जीवों के आत्मा को आत्मस्वरूप में देखता है। ऐसा व्यक्ति कर्म करता हुआ भी कर्म के बंधन में नहीं बंधता।
    🌍 English Translation:
    ✨ One who is established in purity, who has conquered the mind and controlled the senses, who sees his own self in all beings—such a person, though engaged in action, is not bound by karma.
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    🔢 श्लोक संख्या: 35
    🔸 सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।
    🔸 ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ योगयुक्त व्यक्ति, जो समभाव से देखता है, वह अपने आत्मा को सभी प्राणियों में और सभी प्राणियों को अपने आत्मा में देखता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ A yogi, who is established in union with the Divine and sees with equality, perceives the Self in all beings and all beings in the Self.
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    🔢 श्लोक संख्या: 36
    🔸 यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
    🔸 तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो व्यक्ति मुझे सभी जगह देखता है और सभी कुछ मुझमें देखता है, मैं उसके लिए अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिए अदृश्य नहीं होता।
    🌍 English Translation:
    ✨ One who sees Me everywhere and sees everything in Me, I am never lost to him, nor is he ever lost to Me.
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    🔢 श्लोक संख्या: 37
    🔸 बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
    🔸 तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जिस व्यक्ति की बुद्धि योगयुक्त होती है, वह पुण्य और पाप दोनों को त्याग देता है। इसलिए योग में स्थित होकर कर्म करो, क्योंकि योग ही कर्मों में कुशलता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ One who is endowed with wisdom in yoga relinquishes both good and evil deeds in this life itself. Therefore, strive for yoga, which is skill in action.
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    🔢 श्लोक संख्या: 38
    🔸 समः शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयोः।
    🔸 शीतोष्णसुखदुःखेषु समः सङ्गविवर्जितः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो शत्रु और मित्र में, मान और अपमान में, सर्दी और गर्मी में, सुख और दुःख में समान रहता है तथा आसक्ति से मुक्त है, वही श्रेष्ठ योगी है।
    🌍 English Translation:
    ✨ That person who remains equal toward friends and foes, honor and dishonor, heat and cold, happiness and distress, and who is free from attachment is the supreme yogi.
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    🔢 श्लोक संख्या: 39
    🔸 यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति।
    🔸 शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो न हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न किसी वस्तु की कामना करता है और शुभ-अशुभ कर्मों का त्याग कर देता है, वह भक्त मुझे प्रिय है।
    🌍 English Translation:
    ✨ One who neither rejoices nor hates, neither laments nor desires, and who renounces both good and evil actions—such a devotee is dear to Me.
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    🔢 श्लोक संख्या: 40
    🔸 विद्या विनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।
    🔸 शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते और चाण्डाल में समान दृष्टि रखते हैं, वे ही सच्चे ज्ञानी हैं।
    🌍 English Translation:
    ✨ The wise see a learned and humble Brahmin, a cow, an elephant, a dog, and a dog-eater with equal vision.
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    🔢 श्लोक संख्या: 41
    🔸 दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।
    🔸 मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ मेरी यह दिव्य माया तीन गुणों से बनी हुई है और अत्यंत दुस्तर है, परन्तु जो मेरी शरण में आते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।
    🌍 English Translation:
    ✨ This divine energy of Mine, consisting of the three modes of material nature, is difficult to overcome. But those who surrender unto Me can easily cross beyond it.
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    🔢 श्लोक संख्या: 42
    🔸 यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः।
    🔸 क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जिस प्रकार एक सूर्य सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार आत्मा सम्पूर्ण शरीर को प्रकाशित करता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ As the sun illuminates the entire world, similarly, the soul within the body illuminates the entire field of the body.
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    🔢 श्लोक संख्या: 43
    🔸 ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः।
    🔸 जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ सत्त्वगुण में स्थित लोग ऊर्ध्वगति को प्राप्त होते हैं, राजसिक प्रकृति के लोग मध्य में रहते हैं, और तामसिक गुण वाले अधोगति को प्राप्त होते हैं।
    🌍 English Translation:
    ✨ Those situated in the mode of goodness rise upward, those in the mode of passion remain in the middle, and those in the mode of ignorance go downward.
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    🔢 श्लोक संख्या: 44
    🔸 त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन।
    🔸 निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ वेद तीन गुणों से युक्त विषयों का प्रतिपादन करते हैं। हे अर्जुन! तुम इन तीनों गुणों से रहित हो जाओ, सभी द्वन्द्वों से मुक्त रहो, सत्त्वगुण में स्थिर रहो और आत्मा के कल्याण में स्थित रहो।
    🌍 English Translation:
    ✨ The Vedas deal with the three modes of material nature. O Arjuna, transcend these modes. Be free from all dualities, be established in the mode of goodness, and focus on self-realization.
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    🔢 श्लोक संख्या: 45
    🔸 य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्।
    🔸 उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जो इसे (आत्मा को) मारने वाला समझता है और जो इसे मरा हुआ मानता है, वे दोनों ही अज्ञानी हैं। आत्मा न तो किसी को मारती है और न ही इसे कोई मार सकता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ One who thinks that the soul kills or is killed does not understand the truth. The soul neither kills nor can be killed.
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    🔢 श्लोक संख्या: 46
    🔸 न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किञ्चन।
    🔸 नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ हे पार्थ! मेरे लिए तीनों लोकों में कोई कर्तव्य नहीं है, न ही कोई अप्राप्त वस्तु है जिसे मुझे प्राप्त करना हो, फिर भी मैं कर्म में स्थित रहता हूँ।
    🌍 English Translation:
    ✨ O Partha! There is nothing in the three worlds for Me to do, nor is there anything unattained that I need to attain, yet I engage in action.
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    🔢 श्लोक संख्या: 47
    🔸 न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
    🔸 तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ इस संसार में ज्ञान के समान कोई भी पवित्र वस्तु नहीं है। जो योग में सिद्ध हो जाता है, वह अपने भीतर ही समय के साथ उस ज्ञान को प्राप्त करता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ There is nothing as purifying as knowledge in this world. A person who is perfected in yoga finds this knowledge within himself in due course of time.
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    🔢 श्लोक संख्या: 48
    🔸 तस्मादज्ञानसंभूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः।
    🔸 छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ इसलिए, अज्ञान से उत्पन्न अपने हृदय में स्थित संदेह को ज्ञान की तलवार से काटकर योग में स्थित होकर उठ खड़े हो, हे भारत!
    🌍 English Translation:
    ✨ Therefore, cutting this doubt in your heart that has arisen from ignorance with the sword of knowledge, stand up and take refuge in yoga, O Bharata!
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    🔢 श्लोक संख्या: 49
    🔸 यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता।
    🔸 योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः॥
    📝 हिंदी अनुवाद:
    ✅ जिस प्रकार वायु रहित स्थान में रखा हुआ दीपक नहीं टिमटिमाता, उसी प्रकार आत्म-संयमी योगी का मन भी योग में स्थिर रहता है।
    🌍 English Translation:
    ✨ Just as a lamp in a windless place does not flicker, so is the mind of the yogi who is disciplined and engaged in the practice of yoga.
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    अक्षयःPublic
    ६/२५/२०२५, ६:००:५१ अ (6/25/2025, 6:00:51 PM)
    एतत् सुन्दरम् अस्ति, किन्तु विरामचिह्नानाम् अन्तरालैः स्पष्टं न पठ्यते।
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