संस्कृत धातुरूप - भ्राश् (Samskrit Dhaturoop - bhrAsh)
भ्राश्
अर्थः (Hindi): चमकना
Meaning (English): to shine, to glitter, to glow, to reign, to be lustrous
लट्लकारः (आत्मनेपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भ्राशते, भ्राश्यते | भ्राशेते, भ्राश्येते | भ्राशन्ते, भ्राश्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | भ्राशसे, भ्राश्यसे | भ्राशेथे, भ्राश्येथे | भ्राशध्वे, भ्राश्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | भ्राशे, भ्राश्ये | भ्राशावहे, भ्राश्यावहे | भ्राशामहे, भ्राश्यामहे |
लिट्लकारः (आत्मनेपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | बभ्राशे, भ्रेशे | बभ्राशाते, भ्रेशाते | बभ्राशिरे, भ्रेशिरे |
| मध्यमपुरुषः | बभ्राशिषे, भ्रेशिषे | बभ्राशाथे, भ्रेशाथे | बभ्राशिध्वे, भ्रेशिध्वे |
| उत्तमपुरुषः | बभ्राशे, भ्रेशे | बभ्राशिवहे, भ्रेशिवहे | बभ्राशिमहे, भ्रेशिमहे |
लुट्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भ्राशिता | भ्राशितारौ | भ्राशितारः |
| मध्यमपुरुषः | भ्राशितासे | भ्राशितासाथे | भ्राशिताध्वे |
| उत्तमपुरुषः | भ्राशिताहे | भ्राशितास्वहे | भ्राशितास्महे |
लृट्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भ्राशिष्यते | भ्राशिष्येते | भ्राशिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | भ्राशिष्यसे | भ्राशिष्येथे | भ्राशिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | भ्राशिष्ये | भ्राशिष्यावहे | भ्राशिष्यामहे |
लोट्लकारः (आत्मनेपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भ्राशताम्, भ्राश्यताम् | भ्राशेताम्, भ्राश्येताम् | भ्राशन्ताम्, भ्राश्यन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | भ्राशस्व, भ्राश्यस्व | भ्राशेथाम्, भ्राश्येथाम् | भ्राशध्वम्, भ्राश्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | भ्राशै, भ्राश्यै | भ्राशावहै, भ्राश्यावहै | भ्राशामहै, भ्राश्यामहै |
लङ्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अभ्राशत, अभ्राश्यत | अभ्राशेताम्, अभ्राश्येताम् | अभ्राशन्त, अभ्राश्यन्त |
| मध्यमपुरुषः | अभ्राशथाः, अभ्राश्यथाः | अभ्राशेथाम्, अभ्राश्येथाम् | अभ्राशध्वम्, अभ्राश्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अभ्राशे, अभ्राश्ये | अभ्राशावहि, अभ्राश्यावहि | अभ्राशामहि, अभ्राश्यामहि |
विधिलिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भ्राशेत, भ्राश्येत | भ्राशेयाताम्, भ्राश्येयाताम् | भ्राशेरन्, भ्राश्येरन् |
| मध्यमपुरुषः | भ्राशेथाः, भ्राश्येथाः | भ्राशेयाथाम्, भ्राश्येयाथाम् | भ्राशेध्वम्, भ्राश्येध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | भ्राशेय, भ्राश्येय | भ्राशेवहि, भ्राश्येवहि | भ्राशेमहि, भ्राश्येमहि |
आशीर्लिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | भ्राशिषीष्ट | भ्राशिषीयास्ताम् | भ्राशिषीरन् |
| मध्यमपुरुषः | भ्राशिषीष्ठाः | भ्राशिषीयास्थाम् | भ्राशिषीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | भ्राशिषीय | भ्राशिषीवहि | भ्राशिषीमहि |
लुङ्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अभ्राशिष्ट | अभ्राशिषाताम् | अभ्राशिषत |
| मध्यमपुरुषः | अभ्राशिष्ठाः | अभ्राशिषाथाम् | अभ्राशिध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अभ्राशिषि | अभ्राशिष्वहि | अभ्राशिष्महि |
लृङ्लकारः (आत्मनेपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अभ्राशिष्यत | अभ्राशिष्येताम् | अभ्राशिष्यन्त |
| मध्यमपुरुषः | अभ्राशिष्यथाः | अभ्राशिष्येथाम् | अभ्राशिष्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अभ्राशिष्ये | अभ्राशिष्यावहि | अभ्राशिष्यामहि |
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