संस्कृत धातुरूप - ध्रै (Samskrit Dhaturoop - dhrai)
ध्रै
अर्थः (Hindi): तृप्त होना, संतुष्ट होना
Meaning (English): to be pleased, to be satisfied
लट्लकारः (परस्मैपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ध्रायति | ध्रायतः | ध्रायन्ति |
| मध्यमपुरुषः | ध्रायसि | ध्रायथः | ध्रायथ |
| उत्तमपुरुषः | ध्रायामि | ध्रायावः | ध्रायामः |
लिट्लकारः (परस्मैपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | दध्रौ | दध्रतुः | दध्रुः |
| मध्यमपुरुषः | दध्राथ, दध्रिथ | दध्रथुः | दध्र |
| उत्तमपुरुषः | दध्रौ | दध्रिव | दध्रिम |
लुट्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ध्राता | ध्रातारौ | ध्रातारः |
| मध्यमपुरुषः | ध्रातासि | ध्रातास्थः | ध्रातास्थ |
| उत्तमपुरुषः | ध्रातास्मि | ध्रातास्वः | ध्रातास्मः |
लृट्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ध्रास्यति | ध्रास्यतः | ध्रास्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | ध्रास्यसि | ध्रास्यथः | ध्रास्यथ |
| उत्तमपुरुषः | ध्रास्यामि | ध्रास्यावः | ध्रास्यामः |
लोट्लकारः (परस्मैपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ध्रायतात्, ध्रायताद्, ध्रायतु | ध्रायताम् | ध्रायन्तु |
| मध्यमपुरुषः | ध्राय, ध्रायतात्, ध्रायताद् | ध्रायतम् | ध्रायत |
| उत्तमपुरुषः | ध्रायाणि | ध्रायाव | ध्रायाम |
लङ्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अध्रायत्, अध्रायद् | अध्रायताम् | अध्रायन् |
| मध्यमपुरुषः | अध्रायः | अध्रायतम् | अध्रायत |
| उत्तमपुरुषः | अध्रायम् | अध्रायाव | अध्रायाम |
विधिलिङ्लकारः (परस्मैपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ध्रायेत्, ध्रायेद् | ध्रायेताम् | ध्रायेयुः |
| मध्यमपुरुषः | ध्रायेः | ध्रायेतम् | ध्रायेत |
| उत्तमपुरुषः | ध्रायेयम् | ध्रायेव | ध्रायेम |
आशीर्लिङ्लकारः (परस्मैपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ध्रायात्, ध्रायाद्, ध्रेयात्, ध्रेयाद् | ध्रायास्ताम्, ध्रेयास्ताम् | ध्रायासुः, ध्रेयासुः |
| मध्यमपुरुषः | ध्रायाः, ध्रेयाः | ध्रायास्तम्, ध्रेयास्तम् | ध्रायास्त, ध्रेयास्त |
| उत्तमपुरुषः | ध्रायासम्, ध्रेयासम् | ध्रायास्व, ध्रेयास्व | ध्रायास्म, ध्रेयास्म |
लुङ्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अध्रासीत्, अध्रासीद् | अध्रासिष्टाम् | अध्रासिषुः |
| मध्यमपुरुषः | अध्रासीः | अध्रासिष्टम् | अध्रासिष्ट |
| उत्तमपुरुषः | अध्रासिषम् | अध्रासिष्व | अध्रासिष्म |
लृङ्लकारः (परस्मैपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अध्रास्यत्, अध्रास्यद् | अध्रास्यताम् | अध्रास्यन् |
| मध्यमपुरुषः | अध्रास्यः | अध्रास्यतम् | अध्रास्यत |
| उत्तमपुरुषः | अध्रास्यम् | अध्रास्याव | अध्रास्याम |
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