संस्कृत धातुरूप - घष् (Samskrit Dhaturoop - ghaSh)
घष्
अर्थः (Hindi): स्वच्छ करना, चमकाना, साफ करना
Meaning (English): to cleanse, to purify
लट्लकारः (आत्मनेपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | घषते | घषेते | घषन्ते |
| मध्यमपुरुषः | घषसे | घषेथे | घषध्वे |
| उत्तमपुरुषः | घषे | घषावहे | घषामहे |
लिट्लकारः (आत्मनेपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | जघषे | जघषाते | जघषिरे |
| मध्यमपुरुषः | जघषिषे | जघषाथे | जघषिध्वे |
| उत्तमपुरुषः | जघषे | जघषिवहे | जघषिमहे |
लुट्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | घषिता | घषितारौ | घषितारः |
| मध्यमपुरुषः | घषितासे | घषितासाथे | घषिताध्वे |
| उत्तमपुरुषः | घषिताहे | घषितास्वहे | घषितास्महे |
लृट्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | घषिष्यते | घषिष्येते | घषिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | घषिष्यसे | घषिष्येथे | घषिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | घषिष्ये | घषिष्यावहे | घषिष्यामहे |
लोट्लकारः (आत्मनेपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | घषताम् | घषेताम् | घषन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | घषस्व | घषेथाम् | घषध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | घषै | घषावहै | घषामहै |
लङ्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अघषत | अघषेताम् | अघषन्त |
| मध्यमपुरुषः | अघषथाः | अघषेथाम् | अघषध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अघषे | अघषावहि | अघषामहि |
विधिलिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | घषेत | घषेयाताम् | घषेरन् |
| मध्यमपुरुषः | घषेथाः | घषेयाथाम् | घषेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | घषेय | घषेवहि | घषेमहि |
आशीर्लिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | घषिषीष्ट | घषिषीयास्ताम् | घषिषीरन् |
| मध्यमपुरुषः | घषिषीष्ठाः | घषिषीयास्थाम् | घषिषीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | घषिषीय | घषिषीवहि | घषिषीमहि |
लुङ्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अघषिष्ट | अघषिषाताम् | अघषिषत |
| मध्यमपुरुषः | अघषिष्ठाः | अघषिषाथाम् | अघषिध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अघषिषि | अघषिष्वहि | अघषिष्महि |
लृङ्लकारः (आत्मनेपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अघषिष्यत | अघषिष्येताम् | अघषिष्यन्त |
| मध्यमपुरुषः | अघषिष्यथाः | अघषिष्येथाम् | अघषिष्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अघषिष्ये | अघषिष्यावहि | अघषिष्यामहि |
विचाराः (Your Thoughts)
स्वविचारान् लिखतु (Write your thoughts below)
Loading comment access...