संस्कृत धातुरूप - झष् (Samskrit Dhaturoop - jhaSh)
झष्
अर्थः (Hindi): मारना, हिंसा करना
Meaning (English): to kill, to destroy, to hurt
लट्लकारः (परस्मैपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | झषति | झषतः | झषन्ति |
| मध्यमपुरुषः | झषसि | झषथः | झषथ |
| उत्तमपुरुषः | झषामि | झषावः | झषामः |
लिट्लकारः (परस्मैपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | जझाष | जझषतुः | जझषुः |
| मध्यमपुरुषः | जझषिथ | जझषथुः | जझष |
| उत्तमपुरुषः | जझष, जझाष | जझषिव | जझषिम |
लुट्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | झषिता | झषितारौ | झषितारः |
| मध्यमपुरुषः | झषितासि | झषितास्थः | झषितास्थ |
| उत्तमपुरुषः | झषितास्मि | झषितास्वः | झषितास्मः |
लृट्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | झषिष्यति | झषिष्यतः | झषिष्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | झषिष्यसि | झषिष्यथः | झषिष्यथ |
| उत्तमपुरुषः | झषिष्यामि | झषिष्यावः | झषिष्यामः |
लोट्लकारः (परस्मैपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | झषतात्, झषताद्, झषतु | झषताम् | झषन्तु |
| मध्यमपुरुषः | झष, झषतात्, झषताद् | झषतम् | झषत |
| उत्तमपुरुषः | झषाणि | झषाव | झषाम |
लङ्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अझषत्, अझषद् | अझषताम् | अझषन् |
| मध्यमपुरुषः | अझषः | अझषतम् | अझषत |
| उत्तमपुरुषः | अझषम् | अझषाव | अझषाम |
विधिलिङ्लकारः (परस्मैपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | झषेत्, झषेद् | झषेताम् | झषेयुः |
| मध्यमपुरुषः | झषेः | झषेतम् | झषेत |
| उत्तमपुरुषः | झषेयम् | झषेव | झषेम |
आशीर्लिङ्लकारः (परस्मैपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | झष्यात्, झष्याद् | झष्यास्ताम् | झष्यासुः |
| मध्यमपुरुषः | झष्याः | झष्यास्तम् | झष्यास्त |
| उत्तमपुरुषः | झष्यासम् | झष्यास्व | झष्यास्म |
लुङ्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अझषीत्, अझषीद्, अझाषीत्, अझाषीद् | अझषिष्टाम्, अझाषिष्टाम् | अझषिषुः, अझाषिषुः |
| मध्यमपुरुषः | अझषीः, अझाषीः | अझषिष्टम्, अझाषिष्टम् | अझषिष्ट, अझाषिष्ट |
| उत्तमपुरुषः | अझषिषम्, अझाषिषम् | अझषिष्व, अझाषिष्व | अझषिष्म, अझाषिष्म |
लृङ्लकारः (परस्मैपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अझषिष्यत्, अझषिष्यद् | अझषिष्यताम् | अझषिष्यन् |
| मध्यमपुरुषः | अझषिष्यः | अझषिष्यतम् | अझषिष्यत |
| उत्तमपुरुषः | अझषिष्यम् | अझषिष्याव | अझषिष्याम |
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