संस्कृत धातुरूप - कब् (Samskrit Dhaturoop - kab)
कब्
अर्थः (Hindi): प्रशंसा करना, स्तुति करना, रंग देना, रंगना
Meaning (English): to praise, to color, to paint
लट्लकारः (आत्मनेपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | कबते | कबेते | कबन्ते |
| मध्यमपुरुषः | कबसे | कबेथे | कबध्वे |
| उत्तमपुरुषः | कबे | कबावहे | कबामहे |
लिट्लकारः (आत्मनेपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | चकबे | चकबाते | चकबिरे |
| मध्यमपुरुषः | चकबिषे | चकबाथे | चकबिध्वे |
| उत्तमपुरुषः | चकबे | चकबिवहे | चकबिमहे |
लुट्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | कबिता | कबितारौ | कबितारः |
| मध्यमपुरुषः | कबितासे | कबितासाथे | कबिताध्वे |
| उत्तमपुरुषः | कबिताहे | कबितास्वहे | कबितास्महे |
लृट्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | कबिष्यते | कबिष्येते | कबिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | कबिष्यसे | कबिष्येथे | कबिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | कबिष्ये | कबिष्यावहे | कबिष्यामहे |
लोट्लकारः (आत्मनेपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | कबताम् | कबेताम् | कबन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | कबस्व | कबेथाम् | कबध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | कबै | कबावहै | कबामहै |
लङ्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अकबत | अकबेताम् | अकबन्त |
| मध्यमपुरुषः | अकबथाः | अकबेथाम् | अकबध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अकबे | अकबावहि | अकबामहि |
विधिलिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | कबेत | कबेयाताम् | कबेरन् |
| मध्यमपुरुषः | कबेथाः | कबेयाथाम् | कबेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | कबेय | कबेवहि | कबेमहि |
आशीर्लिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | कबिषीष्ट | कबिषीयास्ताम् | कबिषीरन् |
| मध्यमपुरुषः | कबिषीष्ठाः | कबिषीयास्थाम् | कबिषीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | कबिषीय | कबिषीवहि | कबिषीमहि |
लुङ्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अकबिष्ट | अकबिषाताम् | अकबिषत |
| मध्यमपुरुषः | अकबिष्ठाः | अकबिषाथाम् | अकबिध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अकबिषि | अकबिष्वहि | अकबिष्महि |
लृङ्लकारः (आत्मनेपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अकबिष्यत | अकबिष्येताम् | अकबिष्यन्त |
| मध्यमपुरुषः | अकबिष्यथाः | अकबिष्येथाम् | अकबिष्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अकबिष्ये | अकबिष्यावहि | अकबिष्यामहि |
विचाराः (Your Thoughts)
स्वविचारान् लिखतु (Write your thoughts below)
Loading comment access...