संस्कृत धातुरूप - खच् (Samskrit Dhaturoop - khach)
खच्
अर्थः (Hindi): मर्यादा होने पर भी देर से जन्म लेना, संपत्ति युक्त करना, स्वेच्छया पवित्र करना
Meaning (English): to occur in abundance
लट्लकारः (परस्मैपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खच्ञाति | खच्ञीतः | खच्ञन्ति |
| मध्यमपुरुषः | खच्ञासि | खच्ञीथः | खच्ञीथ |
| उत्तमपुरुषः | खच्ञामि | खच्ञीवः | खच्ञीमः |
लिट्लकारः (परस्मैपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | चखाच | चखचतुः | चखचुः |
| मध्यमपुरुषः | चखचिथ | चखचथुः | चखच |
| उत्तमपुरुषः | चखच, चखाच | चखचिव | चखचिम |
लुट्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खचिता | खचितारौ | खचितारः |
| मध्यमपुरुषः | खचितासि | खचितास्थः | खचितास्थ |
| उत्तमपुरुषः | खचितास्मि | खचितास्वः | खचितास्मः |
लृट्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खचिष्यति | खचिष्यतः | खचिष्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | खचिष्यसि | खचिष्यथः | खचिष्यथ |
| उत्तमपुरुषः | खचिष्यामि | खचिष्यावः | खचिष्यामः |
लोट्लकारः (परस्मैपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खच्ञातु, खच्ञीतात्, खच्ञीताद् | खच्ञीताम् | खच्ञन्तु |
| मध्यमपुरुषः | खचान, खच्ञीतात्, खच्ञीताद् | खच्ञीतम् | खच्ञीत |
| उत्तमपुरुषः | खच्ञानि | खच्ञाव | खच्ञाम |
लङ्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अखच्ञात्, अखच्ञाद् | अखच्ञीताम् | अखच्ञन् |
| मध्यमपुरुषः | अखच्ञाः | अखच्ञीतम् | अखच्ञीत |
| उत्तमपुरुषः | अखच्ञाम् | अखच्ञीव | अखच्ञीम |
विधिलिङ्लकारः (परस्मैपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खच्ञीयात्, खच्ञीयाद् | खच्ञीयाताम् | खच्ञीयुः |
| मध्यमपुरुषः | खच्ञीयाः | खच्ञीयातम् | खच्ञीयात |
| उत्तमपुरुषः | खच्ञीयाम् | खच्ञीयाव | खच्ञीयाम |
आशीर्लिङ्लकारः (परस्मैपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खच्यात्, खच्याद् | खच्यास्ताम् | खच्यासुः |
| मध्यमपुरुषः | खच्याः | खच्यास्तम् | खच्यास्त |
| उत्तमपुरुषः | खच्यासम् | खच्यास्व | खच्यास्म |
लुङ्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अखचीत्, अखचीद्, अखाचीत्, अखाचीद् | अखचिष्टाम्, अखाचिष्टाम् | अखचिषुः, अखाचिषुः |
| मध्यमपुरुषः | अखचीः, अखाचीः | अखचिष्टम्, अखाचिष्टम् | अखचिष्ट, अखाचिष्ट |
| उत्तमपुरुषः | अखचिषम्, अखाचिषम् | अखचिष्व, अखाचिष्व | अखचिष्म, अखाचिष्म |
लृङ्लकारः (परस्मैपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अखचिष्यत्, अखचिष्यद् | अखचिष्यताम् | अखचिष्यन् |
| मध्यमपुरुषः | अखचिष्यः | अखचिष्यतम् | अखचिष्यत |
| उत्तमपुरुषः | अखचिष्यम् | अखचिष्याव | अखचिष्याम |
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