संस्कृत धातुरूप - खण्ड् (Samskrit Dhaturoop - khaND)
खण्ड्
अर्थः (Hindi): टुकड़े करना, खण्डित करना, काटना, विभाग करना
Meaning (English): to break in pieces,to break,to cut,to tear to pieces
लट्लकारः (आत्मनेपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खण्डते | खण्डेते | खण्डन्ते |
| मध्यमपुरुषः | खण्डसे | खण्डेथे | खण्डध्वे |
| उत्तमपुरुषः | खण्डे | खण्डावहे | खण्डामहे |
लिट्लकारः (आत्मनेपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | चखण्डे | चखण्डाते | चखण्डिरे |
| मध्यमपुरुषः | चखण्डिषे | चखण्डाथे | चखण्डिध्वे |
| उत्तमपुरुषः | चखण्डे | चखण्डिवहे | चखण्डिमहे |
लुट्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खण्डिता | खण्डितारौ | खण्डितारः |
| मध्यमपुरुषः | खण्डितासे | खण्डितासाथे | खण्डिताध्वे |
| उत्तमपुरुषः | खण्डिताहे | खण्डितास्वहे | खण्डितास्महे |
लृट्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खण्डिष्यते | खण्डिष्येते | खण्डिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | खण्डिष्यसे | खण्डिष्येथे | खण्डिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | खण्डिष्ये | खण्डिष्यावहे | खण्डिष्यामहे |
लोट्लकारः (आत्मनेपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खण्डताम् | खण्डेताम् | खण्डन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | खण्डस्व | खण्डेथाम् | खण्डध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | खण्डै | खण्डावहै | खण्डामहै |
लङ्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अखण्डत | अखण्डेताम् | अखण्डन्त |
| मध्यमपुरुषः | अखण्डथाः | अखण्डेथाम् | अखण्डध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अखण्डे | अखण्डावहि | अखण्डामहि |
विधिलिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खण्डेत | खण्डेयाताम् | खण्डेरन् |
| मध्यमपुरुषः | खण्डेथाः | खण्डेयाथाम् | खण्डेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | खण्डेय | खण्डेवहि | खण्डेमहि |
आशीर्लिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | खण्डिषीष्ट | खण्डिषीयास्ताम् | खण्डिषीरन् |
| मध्यमपुरुषः | खण्डिषीष्ठाः | खण्डिषीयास्थाम् | खण्डिषीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | खण्डिषीय | खण्डिषीवहि | खण्डिषीमहि |
लुङ्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अखण्डिष्ट | अखण्डिषाताम् | अखण्डिषत |
| मध्यमपुरुषः | अखण्डिष्ठाः | अखण्डिषाथाम् | अखण्डिध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अखण्डिषि | अखण्डिष्वहि | अखण्डिष्महि |
लृङ्लकारः (आत्मनेपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अखण्डिष्यत | अखण्डिष्येताम् | अखण्डिष्यन्त |
| मध्यमपुरुषः | अखण्डिष्यथाः | अखण्डिष्येथाम् | अखण्डिष्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अखण्डिष्ये | अखण्डिष्यावहि | अखण्डिष्यामहि |
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