संस्कृत धातुरूप - मङ्ग् (Samskrit Dhaturoop - ma~Ng)
मङ्ग्
अर्थः (Hindi): जाना
Meaning (English): to go
लट्लकारः (परस्मैपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | मङ्गति | मङ्गतः | मङ्गन्ति |
| मध्यमपुरुषः | मङ्गसि | मङ्गथः | मङ्गथ |
| उत्तमपुरुषः | मङ्गामि | मङ्गावः | मङ्गामः |
लिट्लकारः (परस्मैपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ममङ्ग | ममङ्गतुः | ममङ्गुः |
| मध्यमपुरुषः | ममङ्गिथ | ममङ्गथुः | ममङ्ग |
| उत्तमपुरुषः | ममङ्ग | ममङ्गिव | ममङ्गिम |
लुट्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | मङ्गिता | मङ्गितारौ | मङ्गितारः |
| मध्यमपुरुषः | मङ्गितासि | मङ्गितास्थः | मङ्गितास्थ |
| उत्तमपुरुषः | मङ्गितास्मि | मङ्गितास्वः | मङ्गितास्मः |
लृट्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | मङ्गिष्यति | मङ्गिष्यतः | मङ्गिष्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | मङ्गिष्यसि | मङ्गिष्यथः | मङ्गिष्यथ |
| उत्तमपुरुषः | मङ्गिष्यामि | मङ्गिष्यावः | मङ्गिष्यामः |
लोट्लकारः (परस्मैपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | मङ्गतात्, मङ्गताद्, मङ्गतु | मङ्गताम् | मङ्गन्तु |
| मध्यमपुरुषः | मङ्ग, मङ्गतात्, मङ्गताद् | मङ्गतम् | मङ्गत |
| उत्तमपुरुषः | मङ्गानि | मङ्गाव | मङ्गाम |
लङ्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अमङ्गत्, अमङ्गद् | अमङ्गताम् | अमङ्गन् |
| मध्यमपुरुषः | अमङ्गः | अमङ्गतम् | अमङ्गत |
| उत्तमपुरुषः | अमङ्गम् | अमङ्गाव | अमङ्गाम |
विधिलिङ्लकारः (परस्मैपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | मङ्गेत्, मङ्गेद् | मङ्गेताम् | मङ्गेयुः |
| मध्यमपुरुषः | मङ्गेः | मङ्गेतम् | मङ्गेत |
| उत्तमपुरुषः | मङ्गेयम् | मङ्गेव | मङ्गेम |
आशीर्लिङ्लकारः (परस्मैपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | मङ्ग्यात्, मङ्ग्याद् | मङ्ग्यास्ताम् | मङ्ग्यासुः |
| मध्यमपुरुषः | मङ्ग्याः | मङ्ग्यास्तम् | मङ्ग्यास्त |
| उत्तमपुरुषः | मङ्ग्यासम् | मङ्ग्यास्व | मङ्ग्यास्म |
लुङ्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अमङ्गीत्, अमङ्गीद् | अमङ्गिष्टाम् | अमङ्गिषुः |
| मध्यमपुरुषः | अमङ्गीः | अमङ्गिष्टम् | अमङ्गिष्ट |
| उत्तमपुरुषः | अमङ्गिषम् | अमङ्गिष्व | अमङ्गिष्म |
लृङ्लकारः (परस्मैपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अमङ्गिष्यत्, अमङ्गिष्यद् | अमङ्गिष्यताम् | अमङ्गिष्यन् |
| मध्यमपुरुषः | अमङ्गिष्यः | अमङ्गिष्यतम् | अमङ्गिष्यत |
| उत्तमपुरुषः | अमङ्गिष्यम् | अमङ्गिष्याव | अमङ्गिष्याम |
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