संस्कृत धातुरूप - ऊष् (Samskrit Dhaturoop - USh)
ऊष्
अर्थः (Hindi): रोगी होना, बीमार होना
Meaning (English): to be ill
लट्लकारः (परस्मैपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ऊषति | ऊषतः | ऊषन्ति |
| मध्यमपुरुषः | ऊषसि | ऊषथः | ऊषथ |
| उत्तमपुरुषः | ऊषामि | ऊषावः | ऊषामः |
लिट्लकारः (परस्मैपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ऊषाञ्चकार, ऊषामास, ऊषाम्बभूव | ऊषाञ्चक्रतुः, ऊषामासतुः, ऊषाम्बभूवतुः | ऊषाञ्चक्रुः, ऊषामासुः, ऊषाम्बभूवुः |
| मध्यमपुरुषः | ऊषाञ्चकर्थ, ऊषामासिथ, ऊषाम्बभूविथ | ऊषाञ्चक्रथुः, ऊषामासथुः, ऊषाम्बभूवथुः | ऊषाञ्चक्र, ऊषामास, ऊषाम्बभूव |
| उत्तमपुरुषः | ऊषाञ्चकर, ऊषाञ्चकार, ऊषामास, ऊषाम्बभूव | ऊषाञ्चकृव, ऊषामासिव, ऊषाम्बभूविव | ऊषाञ्चकृम, ऊषामासिम, ऊषाम्बभूविम |
लुट्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ऊषिता | ऊषितारौ | ऊषितारः |
| मध्यमपुरुषः | ऊषितासि | ऊषितास्थः | ऊषितास्थ |
| उत्तमपुरुषः | ऊषितास्मि | ऊषितास्वः | ऊषितास्मः |
लृट्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ऊषिष्यति | ऊषिष्यतः | ऊषिष्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | ऊषिष्यसि | ऊषिष्यथः | ऊषिष्यथ |
| उत्तमपुरुषः | ऊषिष्यामि | ऊषिष्यावः | ऊषिष्यामः |
लोट्लकारः (परस्मैपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ऊषतात्, ऊषताद्, ऊषतु | ऊषताम् | ऊषन्तु |
| मध्यमपुरुषः | ऊष, ऊषतात्, ऊषताद् | ऊषतम् | ऊषत |
| उत्तमपुरुषः | ऊषाणि | ऊषाव | ऊषाम |
लङ्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | औषत्, औषद् | औषताम् | औषन् |
| मध्यमपुरुषः | औषः | औषतम् | औषत |
| उत्तमपुरुषः | औषम् | औषाव | औषाम |
विधिलिङ्लकारः (परस्मैपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ऊषेत्, ऊषेद् | ऊषेताम् | ऊषेयुः |
| मध्यमपुरुषः | ऊषेः | ऊषेतम् | ऊषेत |
| उत्तमपुरुषः | ऊषेयम् | ऊषेव | ऊषेम |
आशीर्लिङ्लकारः (परस्मैपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ऊष्यात्, ऊष्याद् | ऊष्यास्ताम् | ऊष्यासुः |
| मध्यमपुरुषः | ऊष्याः | ऊष्यास्तम् | ऊष्यास्त |
| उत्तमपुरुषः | ऊष्यासम् | ऊष्यास्व | ऊष्यास्म |
लुङ्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | औषीत्, औषीद् | औषिष्टाम् | औषिषुः |
| मध्यमपुरुषः | औषीः | औषिष्टम् | औषिष्ट |
| उत्तमपुरुषः | औषिषम् | औषिष्व | औषिष्म |
लृङ्लकारः (परस्मैपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | औषिष्यत्, औषिष्यद् | औषिष्यताम् | औषिष्यन् |
| मध्यमपुरुषः | औषिष्यः | औषिष्यतम् | औषिष्यत |
| उत्तमपुरुषः | औषिष्यम् | औषिष्याव | औषिष्याम |
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