संस्कृत धातुरूप - श्वञ्च् (Samskrit Dhaturoop - shva~nch)
श्वञ्च्
अर्थः (Hindi): जाना
Meaning (English): to go
लट्लकारः (आत्मनेपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | श्वञ्चते | श्वञ्चेते | श्वञ्चन्ते |
| मध्यमपुरुषः | श्वञ्चसे | श्वञ्चेथे | श्वञ्चध्वे |
| उत्तमपुरुषः | श्वञ्चे | श्वञ्चावहे | श्वञ्चामहे |
लिट्लकारः (आत्मनेपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | शश्वञ्चे | शश्वञ्चाते | शश्वञ्चिरे |
| मध्यमपुरुषः | शश्वञ्चिषे | शश्वञ्चाथे | शश्वञ्चिध्वे |
| उत्तमपुरुषः | शश्वञ्चे | शश्वञ्चिवहे | शश्वञ्चिमहे |
लुट्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | श्वञ्चिता | श्वञ्चितारौ | श्वञ्चितारः |
| मध्यमपुरुषः | श्वञ्चितासे | श्वञ्चितासाथे | श्वञ्चिताध्वे |
| उत्तमपुरुषः | श्वञ्चिताहे | श्वञ्चितास्वहे | श्वञ्चितास्महे |
लृट्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | श्वञ्चिष्यते | श्वञ्चिष्येते | श्वञ्चिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | श्वञ्चिष्यसे | श्वञ्चिष्येथे | श्वञ्चिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | श्वञ्चिष्ये | श्वञ्चिष्यावहे | श्वञ्चिष्यामहे |
लोट्लकारः (आत्मनेपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | श्वञ्चताम् | श्वञ्चेताम् | श्वञ्चन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | श्वञ्चस्व | श्वञ्चेथाम् | श्वञ्चध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | श्वञ्चै | श्वञ्चावहै | श्वञ्चामहै |
लङ्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अश्वञ्चत | अश्वञ्चेताम् | अश्वञ्चन्त |
| मध्यमपुरुषः | अश्वञ्चथाः | अश्वञ्चेथाम् | अश्वञ्चध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अश्वञ्चे | अश्वञ्चावहि | अश्वञ्चामहि |
विधिलिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | श्वञ्चेत | श्वञ्चेयाताम् | श्वञ्चेरन् |
| मध्यमपुरुषः | श्वञ्चेथाः | श्वञ्चेयाथाम् | श्वञ्चेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | श्वञ्चेय | श्वञ्चेवहि | श्वञ्चेमहि |
आशीर्लिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | श्वञ्चिषीष्ट | श्वञ्चिषीयास्ताम् | श्वञ्चिषीरन् |
| मध्यमपुरुषः | श्वञ्चिषीष्ठाः | श्वञ्चिषीयास्थाम् | श्वञ्चिषीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | श्वञ्चिषीय | श्वञ्चिषीवहि | श्वञ्चिषीमहि |
लुङ्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अश्वञ्चिष्ट | अश्वञ्चिषाताम् | अश्वञ्चिषत |
| मध्यमपुरुषः | अश्वञ्चिष्ठाः | अश्वञ्चिषाथाम् | अश्वञ्चिध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अश्वञ्चिषि | अश्वञ्चिष्वहि | अश्वञ्चिष्महि |
लृङ्लकारः (आत्मनेपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अश्वञ्चिष्यत | अश्वञ्चिष्येताम् | अश्वञ्चिष्यन्त |
| मध्यमपुरुषः | अश्वञ्चिष्यथाः | अश्वञ्चिष्येथाम् | अश्वञ्चिष्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अश्वञ्चिष्ये | अश्वञ्चिष्यावहि | अश्वञ्चिष्यामहि |
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