संस्कृत धातुरूप - स्वृ (Samskrit Dhaturoop - svRRi)
स्वृ
अर्थः (Hindi): शब्द करना, रोगी होना, दुःख देना, सताना
Meaning (English): to sound, to be ill, to irritate, to trouble
लट्लकारः (परस्मैपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | स्वरति | स्वरतः | स्वरन्ति |
| मध्यमपुरुषः | स्वरसि | स्वरथः | स्वरथ |
| उत्तमपुरुषः | स्वरामि | स्वरावः | स्वरामः |
लिट्लकारः (परस्मैपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | सस्वार | सस्वरतुः | सस्वरुः |
| मध्यमपुरुषः | सस्वरिथ, सस्वर्थ | सस्वरथुः | सस्वर |
| उत्तमपुरुषः | सस्वर, सस्वार | सस्वरिव | सस्वरिम |
लुट्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | स्वरिता, स्वर्ता | स्वरितारौ, स्वर्तारौ | स्वरितारः, स्वर्तारः |
| मध्यमपुरुषः | स्वरितासि, स्वर्तासि | स्वरितास्थः, स्वर्तास्थः | स्वरितास्थ, स्वर्तास्थ |
| उत्तमपुरुषः | स्वरितास्मि, स्वर्तास्मि | स्वरितास्वः, स्वर्तास्वः | स्वरितास्मः, स्वर्तास्मः |
लृट्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | स्वरिष्यति | स्वरिष्यतः | स्वरिष्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | स्वरिष्यसि | स्वरिष्यथः | स्वरिष्यथ |
| उत्तमपुरुषः | स्वरिष्यामि | स्वरिष्यावः | स्वरिष्यामः |
लोट्लकारः (परस्मैपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | स्वरतात्, स्वरताद्, स्वरतु | स्वरताम् | स्वरन्तु |
| मध्यमपुरुषः | स्वर, स्वरतात्, स्वरताद् | स्वरतम् | स्वरत |
| उत्तमपुरुषः | स्वराणि | स्वराव | स्वराम |
लङ्लकारः (परस्मैपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अस्वरत्, अस्वरद् | अस्वरताम् | अस्वरन् |
| मध्यमपुरुषः | अस्वरः | अस्वरतम् | अस्वरत |
| उत्तमपुरुषः | अस्वरम् | अस्वराव | अस्वराम |
विधिलिङ्लकारः (परस्मैपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | स्वरेत्, स्वरेद् | स्वरेताम् | स्वरेयुः |
| मध्यमपुरुषः | स्वरेः | स्वरेतम् | स्वरेत |
| उत्तमपुरुषः | स्वरेयम् | स्वरेव | स्वरेम |
आशीर्लिङ्लकारः (परस्मैपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | स्वर्यात्, स्वर्याद् | स्वर्यास्ताम् | स्वर्यासुः |
| मध्यमपुरुषः | स्वर्याः | स्वर्यास्तम् | स्वर्यास्त |
| उत्तमपुरुषः | स्वर्यासम् | स्वर्यास्व | स्वर्यास्म |
लुङ्लकारः (परस्मैपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अस्वारीत्, अस्वारीद्, अस्वार्षीत्, अस्वार्षीद् | अस्वारिष्टाम्, अस्वार्ष्टाम् | अस्वारिषुः, अस्वार्षुः |
| मध्यमपुरुषः | अस्वारीः, अस्वार्षीः | अस्वारिष्टम्, अस्वार्ष्टम् | अस्वारिष्ट, अस्वार्ष्ट |
| उत्तमपुरुषः | अस्वारिषम्, अस्वार्षम् | अस्वारिष्व, अस्वार्ष्व | अस्वारिष्म, अस्वार्ष्म |
लृङ्लकारः (परस्मैपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अस्वरिष्यत्, अस्वरिष्यद् | अस्वरिष्यताम् | अस्वरिष्यन् |
| मध्यमपुरुषः | अस्वरिष्यः | अस्वरिष्यतम् | अस्वरिष्यत |
| उत्तमपुरुषः | अस्वरिष्यम् | अस्वरिष्याव | अस्वरिष्याम |
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