संस्कृत धातुरूप - विष्क् (Samskrit Dhaturoop - viShk)
विष्क्
अर्थः (Hindi): मार डालना
Meaning (English): to kill, to destroy
लट्लकारः (आत्मनेपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | विष्कयते | विष्कयेते | विष्कयन्ते |
| मध्यमपुरुषः | विष्कयसे | विष्कयेथे | विष्कयध्वे |
| उत्तमपुरुषः | विष्कये | विष्कयावहे | विष्कयामहे |
लिट्लकारः (आत्मनेपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | विष्कयाञ्चक्रे, विष्कयामास, विष्कयाम्बभूव | विष्कयाञ्चक्राते, विष्कयामासतुः, विष्कयाम्बभूवतुः | विष्कयाञ्चक्रिरे, विष्कयामासुः, विष्कयाम्बभूवुः |
| मध्यमपुरुषः | विष्कयाञ्चकृषे, विष्कयामासिथ, विष्कयाम्बभूविथ | विष्कयाञ्चक्राथे, विष्कयामासथुः, विष्कयाम्बभूवथुः | विष्कयाञ्चकृढ्वे, विष्कयामास, विष्कयाम्बभूव |
| उत्तमपुरुषः | विष्कयाञ्चक्रे, विष्कयामास, विष्कयाम्बभूव | विष्कयाञ्चकृवहे, विष्कयामासिव, विष्कयाम्बभूविव | विष्कयाञ्चकृमहे, विष्कयामासिम, विष्कयाम्बभूविम |
लुट्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | विष्कयिता | विष्कयितारौ | विष्कयितारः |
| मध्यमपुरुषः | विष्कयितासे | विष्कयितासाथे | विष्कयिताध्वे |
| उत्तमपुरुषः | विष्कयिताहे | विष्कयितास्वहे | विष्कयितास्महे |
लृट्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | विष्कयिष्यते | विष्कयिष्येते | विष्कयिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | विष्कयिष्यसे | विष्कयिष्येथे | विष्कयिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | विष्कयिष्ये | विष्कयिष्यावहे | विष्कयिष्यामहे |
लोट्लकारः (आत्मनेपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | विष्कयताम् | विष्कयेताम् | विष्कयन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | विष्कयस्व | विष्कयेथाम् | विष्कयध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | विष्कयै | विष्कयावहै | विष्कयामहै |
लङ्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अविष्कयत | अविष्कयेताम् | अविष्कयन्त |
| मध्यमपुरुषः | अविष्कयथाः | अविष्कयेथाम् | अविष्कयध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अविष्कये | अविष्कयावहि | अविष्कयामहि |
विधिलिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | विष्कयेत | विष्कयेयाताम् | विष्कयेरन् |
| मध्यमपुरुषः | विष्कयेथाः | विष्कयेयाथाम् | विष्कयेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | विष्कयेय | विष्कयेवहि | विष्कयेमहि |
आशीर्लिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | विष्कयिषीष्ट | विष्कयिषीयास्ताम् | विष्कयिषीरन् |
| मध्यमपुरुषः | विष्कयिषीष्ठाः | विष्कयिषीयास्थाम् | विष्कयिषीढ्वम्, विष्कयिषीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | विष्कयिषीय | विष्कयिषीवहि | विष्कयिषीमहि |
लुङ्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अविविष्कत | अविविष्केताम् | अविविष्कन्त |
| मध्यमपुरुषः | अविविष्कथाः | अविविष्केथाम् | अविविष्कध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अविविष्के | अविविष्कावहि | अविविष्कामहि |
लृङ्लकारः (आत्मनेपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अविष्कयिष्यत | अविष्कयिष्येताम् | अविष्कयिष्यन्त |
| मध्यमपुरुषः | अविष्कयिष्यथाः | अविष्कयिष्येथाम् | अविष्कयिष्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अविष्कयिष्ये | अविष्कयिष्यावहि | अविष्कयिष्यामहि |
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