संस्कृत धातुरूप - यक्ष् (Samskrit Dhaturoop - yakSh)
यक्ष्
अर्थः (Hindi): आराधना करना, पूजा करना, सत्कार करना
Meaning (English): to pray, to worship, to respect
लट्लकारः (आत्मनेपदम्)वर्तमानार्थे लट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | यक्षयते | यक्षयेते | यक्षयन्ते |
| मध्यमपुरुषः | यक्षयसे | यक्षयेथे | यक्षयध्वे |
| उत्तमपुरुषः | यक्षये | यक्षयावहे | यक्षयामहे |
लिट्लकारः (आत्मनेपदम्)भूतानद्यतनपरोक्षार्थे लिट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | यक्षयाञ्चक्रे, यक्षयामास, यक्षयाम्बभूव | यक्षयाञ्चक्राते, यक्षयामासतुः, यक्षयाम्बभूवतुः | यक्षयाञ्चक्रिरे, यक्षयामासुः, यक्षयाम्बभूवुः |
| मध्यमपुरुषः | यक्षयाञ्चकृषे, यक्षयामासिथ, यक्षयाम्बभूविथ | यक्षयाञ्चक्राथे, यक्षयामासथुः, यक्षयाम्बभूवथुः | यक्षयाञ्चकृढ्वे, यक्षयामास, यक्षयाम्बभूव |
| उत्तमपुरुषः | यक्षयाञ्चक्रे, यक्षयामास, यक्षयाम्बभूव | यक्षयाञ्चकृवहे, यक्षयामासिव, यक्षयाम्बभूविव | यक्षयाञ्चकृमहे, यक्षयामासिम, यक्षयाम्बभूविम |
लुट्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभविष्यदर्थे लुट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | यक्षयिता | यक्षयितारौ | यक्षयितारः |
| मध्यमपुरुषः | यक्षयितासे | यक्षयितासाथे | यक्षयिताध्वे |
| उत्तमपुरुषः | यक्षयिताहे | यक्षयितास्वहे | यक्षयितास्महे |
लृट्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभविष्यदर्थे लृट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | यक्षयिष्यते | यक्षयिष्येते | यक्षयिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | यक्षयिष्यसे | यक्षयिष्येथे | यक्षयिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | यक्षयिष्ये | यक्षयिष्यावहे | यक्षयिष्यामहे |
लोट्लकारः (आत्मनेपदम्)आज्ञाद्यर्थेषु लोट्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | यक्षयताम् | यक्षयेताम् | यक्षयन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | यक्षयस्व | यक्षयेथाम् | यक्षयध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | यक्षयै | यक्षयावहै | यक्षयामहै |
लङ्लकारः (आत्मनेपदम्)अनद्यतनभूतार्थे लङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अयक्षयत | अयक्षयेताम् | अयक्षयन्त |
| मध्यमपुरुषः | अयक्षयथाः | अयक्षयेथाम् | अयक्षयध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अयक्षये | अयक्षयावहि | अयक्षयामहि |
विधिलिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)विधिनिमन्त्रणाद्यर्थेषु विधिलिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | यक्षयेत | यक्षयेयाताम् | यक्षयेरन् |
| मध्यमपुरुषः | यक्षयेथाः | यक्षयेयाथाम् | यक्षयेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | यक्षयेय | यक्षयेवहि | यक्षयेमहि |
आशीर्लिङ्लकारः (आत्मनेपदम्)आशीर्वादार्थे आशीर्लिङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | यक्षयिषीष्ट | यक्षयिषीयास्ताम् | यक्षयिषीरन् |
| मध्यमपुरुषः | यक्षयिषीष्ठाः | यक्षयिषीयास्थाम् | यक्षयिषीढ्वम्, यक्षयिषीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | यक्षयिषीय | यक्षयिषीवहि | यक्षयिषीमहि |
लुङ्लकारः (आत्मनेपदम्)सामान्यभूतार्थे लुङ्
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अययक्षत | अययक्षेताम् | अययक्षन्त |
| मध्यमपुरुषः | अययक्षथाः | अययक्षेथाम् | अययक्षध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अययक्षे | अययक्षावहि | अययक्षामहि |
लृङ्लकारः (आत्मनेपदम्)हेतुहेतुमद्भावादि लिङ्निमित्तं तत्र भविष्यदर्थे लृङ् क्रियातिपत्तौ
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अयक्षयिष्यत | अयक्षयिष्येताम् | अयक्षयिष्यन्त |
| मध्यमपुरुषः | अयक्षयिष्यथाः | अयक्षयिष्येथाम् | अयक्षयिष्यध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अयक्षयिष्ये | अयक्षयिष्यावहि | अयक्षयिष्यामहि |
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